World News: अमेरिका में रूस के खिलाफ लाए गए एक कड़े प्रतिबंध विधेयक को लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए हाल ही में मतदान संपन्न हुआ है, जिसमें इसे शुरुआती सफलता मिली है। इस नए विधेयक के कानून बन जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों पर भारी-भरकम टैक्स लगाने की असीमित शक्ति मिल जाएगी जो रूस से तेल और प्राकृतिक गैस की खरीद करते हैं।
प्रक्रियात्मक बाधाओं को पार करते हुए यह प्रस्ताव मंगलवार को प्रतिनिधि सभा में भारी चर्चा का विषय बना रहा। इस वोटिंग के दौरान कुछ डेमोक्रेटिक सांसदों ने अपनी पार्टी की लाइन से हटकर रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में मतदान किया, जिससे विपक्षी खेमे को बड़ा झटका लगा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस विधेयक पर अंतिम मुहर लगने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीति के समीकरण पूरी तरह से बदल सकते हैं.
इस प्रस्तावित कानून का सबसे ज्यादा असर भारत और चीन जैसे बड़े एशियाई देशों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। चूँकि ये देश ऊर्जा जरूरतों के लिए रूसी तेल पर काफी हद तक निर्भर हैं, इसलिए अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने का खतरा मंडरा रहा है। अमेरिकी सीनेट इसे पहले ही भारी बहुमत से पारित कर चुकी है, और अब प्रतिनिधि सभा में अंतिम मतदान होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
व्हाइट हाउस और इस विधेयक के समर्थकों का मुख्य उद्देश्य मॉस्को की उस कमाई पर लगाम कसना है, जिसका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ चल रहे सैन्य संघर्ष को वित्तपोषित करने के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा, अमेरिका उन गुप्त जहाजों या शैडो फ्लीट पर भी नकेल कसने की तैयारी में है जो प्रतिबंधों को दरकिनार कर रूसी तेल को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
Author: Shivam Verma
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