देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों की निगाहें इस समय आने वाले आठवें वेतन आयोग पर टिकी हुई हैं. हर तरफ यही चर्चा चल रही है कि नई सिफारिशें लागू होने के बाद सरकारी कर्मचारियों के वेतन में कितना बंपर उछाल आएगा. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान फिटमेंट फैक्टर शब्द सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है. भले ही विभिन्न कर्मचारी संगठन फिटमेंट फैक्टर को ज्यादा रखने की लगातार मांग कर रहे हों, लेकिन अंदरखाने से मिल रही जानकारी बताती है कि सरकार इसे 2.1 के आसपास तय कर सकती है.
पहली नजर में यह आंकड़ा देखने पर थोड़ा कम लग सकता है, खासकर तब जब पिछले सातवें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया गया था. हालांकि, यदि वित्तीय विशेषज्ञों की मानें तो आंकड़ों का यह खेल सिर्फ ऊपरी तौर पर निराशाजनक लग सकता है. अगर फिटमेंट फैक्टर 2.1 भी रहता है, तब भी कर्मचारियों की जेब में पहले से काफी ज्यादा रकम आने वाली है. वेतन आयोग के लाभों को आंकने का केवल फिटमेंट फैक्टर ही एकमात्र पैमाना नहीं होता है.
किसी भी सैलरी रिवीजन का वास्तविक आर्थिक लाभ इस बात पर पूरी तरह निर्भर करता है कि बदलाव के वक्त कर्मचारी की मूल सैलरी और उस पर मिलने वाला महंगाई भत्ता कितना है. अगर सातवें वेतन आयोग के समय की बात करें तो न्यूनतम बेसिक पे 7,000 रुपये थी. उस वक्त 2.57 का फैक्टर लगने से बेसिक पे 18,000 रुपये हो गई थी, लेकिन कर्मचारी पहले से ही 125 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता पा रहे थे, जिससे शुद्ध फायदा सीमित रह गया था.
अब यदि आठवें वेतन आयोग के तहत मौजूदा 18,000 रुपये की बेसिक सैलरी पर 2.1 का फिटमेंट फैक्टर लगाया जाता है, तो नई मूल सैलरी सीधे बढ़कर करीब 38,000 रुपये तक पहुंच जाएगी. वर्तमान में मिल रहे महंगाई भत्ते और नई मूल सैलरी की तुलना करने पर कर्मचारियों को हर महीने सीधे तौर पर बड़ा शुद्ध लाभ मिलने की पूरी उम्मीद है, जो पुराने वेतन आयोग की तुलना में काफी ज्यादा प्रभावशाली साबित होगा.
मूल वेतन में होने वाली इस भारी बढ़ोतरी का सीधा असर कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी पर भी साफ दिखाई देगा. बेसिक पे बढ़ने के साथ ही मकान किराया भत्ता, परिवहन भत्ता और अन्य सभी केंद्रीय भत्ते नए सिरे से कैलकुलेट किए जाएंगे. हालांकि, इस बढ़ी हुई सैलरी का लाभ उठाने के लिए कर्मचारियों को थोड़ा इंतजार करना होगा क्योंकि आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम तस्वीर साफ हो पाएगी.










