Home » दिल्ली » CJI Surya Kant ने ठुकराया राहुल गांधी का मिलने का अनुरोध, एसआईआर विवाद पर दिया बड़ा बयान

CJI Surya Kant ने ठुकराया राहुल गांधी का मिलने का अनुरोध, एसआईआर विवाद पर दिया बड़ा बयान

Facebook
X
WhatsApp

CJI Surya Kant: देश की राजनीति में उस वक्त एक नया मोड़ आ गया जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को मुलाकात के लिए समय देने से साफ इनकार कर दिया। विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सीजेआई से समय मांगा गया था। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सीजेआई कार्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इस विषय पर अलग से कोई बैठक करना उचित नहीं है क्योंकि यह मामला पहले से ही देश की सर्वोच्च अदालत में विचाराधीन है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा उठाए गए इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं हैं। दरअसल, राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की योजना थी कि वे सीजेआई से मिलकर एसआईआर प्रक्रिया को वापस लेने की मांग करेंगे। इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर भी एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा जाना था। इन तमाम गंभीर मुद्दों को लेकर विपक्षी दलों ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक एक बड़े मार्च का भी ऐलान किया हुआ है, जिससे राजधानी दिल्ली का सियासी पारा काफी हाई है।

अदालत के सूत्रों का कहना है कि न्यायपालिका ने अपने रुख में साफ कर दिया है कि वह सरकार के प्रशासनिक और नीतिगत कामकाज में सीधे तौर पर दखलंदाजी नहीं करेगी। हालांकि, सीजेआई की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि विपक्षी दल अपने किसी भी मौलिक अधिकार के हनन को लेकर चिंतित हैं, तो वे उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में अपनी याचिका दाखिल कर सकते हैं। यदि ऐसी कोई याचिका अदालत के समक्ष आती है, तो उस पर सुनवाई के दौरान अन्य संबंधित मामलों के साथ विचार किया जा सकता है।

न्यायिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल मई के महीने में ही सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव आयोग के एसआईआर कराने के अधिकार को पूरी तरह से वैध ठहराया था। अदालत ने अपने उस फैसले में चुनाव आयोग की शक्तियों को बरकरार रखा था। इसके अलावा, मुख्य चुनाव आयुक्त के कुछ फैसलों पर भी सवाल खड़े करने वाली याचिकाएं पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग चल रही हैं, जिनमें यह आरोप लगाया गया है कि आयोग के कुछ निर्णय अन्य सदस्यों की सहमति के बिना लिए गए थे।

राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के अन्य नेताओं द्वारा उठाए जा रहे इन कदमों पर कानूनी जानकारों की तरफ से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ वरिष्ठ वकीलों ने अदालती मामलों के राजनीतिकरण पर आपत्ति जताई है, तो वहीं विपक्ष का यह अडिग रुख है कि वे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए अपनी लड़ाई हरसंभव तरीके से जारी रखेंगे। बहरहाल, अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट में कल होने वाली सुनवाइयों और विपक्ष के इस मार्च पर टिकी हुई हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ताजा खबरें