देशभर में आयोजित होने वाली प्रतियोगी और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए गठित नंदन नीलेकणी टास्क फोर्स का काम अब अंतिम चरण में पहुंच गया है. पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं पर रोक लगाने और परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से बनाई गई इस उच्चस्तरीय समिति को देश के कोने-कोने से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है. छात्रों, अभिभावकों, शिक्षाविदों और विभिन्न संगठनों ने इस मुहिम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है.
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पिछले करीब दो महीनों की अवधि में इस टास्क फोर्स ने लगभग 18 आधिकारिक बैठकें और 40 से अधिक व्यापक परामर्श सत्र आयोजित किए हैं. इन बैठकों के दौरान समिति को विभिन्न माध्यमों से 50 हजार से ज्यादा बहुमूल्य सुझाव प्राप्त हुए हैं. इन सुझावों में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव, परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करना और प्रश्नपत्र निर्माण की गुप्त प्रक्रिया में कड़े सुधार शामिल हैं.
टास्क फोर्स के सामने रखे गए प्रस्तावों में NTA के पुनर्गठन पर खास जोर दिया गया है. यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट समेत कई प्रमुख संगठनों ने सुझाव दिया है कि एजेंसी के महत्वपूर्ण तकनीकी और सुरक्षा पदों को स्थायी कर्मचारियों से भरा जाए, ताकि बाहरी दखलंदाजी की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो सके. इसके अलावा, परीक्षा प्रणाली को आधुनिक तकनीक से लैस करने के लिए साइबर सुरक्षा और डिजिटल फोरेंसिक्स के लिए अलग से विशेष विभाग बनाने की वकालत भी की गई है.
परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार अगले साल से नीट (NEET) जैसी बड़ी परीक्षाओं को पेन-पेपर मोड के बजाय कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी सीबीटी मोड में कराने पर भी गंभीरता से विचार कर रही है. इसके साथ ही, प्रमाणित परीक्षा केंद्रों का एक नया राष्ट्रीय रजिस्टर तैयार करने और परीक्षा से कुछ दिन पहले उनका भौतिक ऑडिट कराने के सख्त नियम बनाए जा रहे हैं ताकि गड़बड़ी करने वालों पर शिकंजा कसा जा सके.
विभिन्न पक्षों से मिले इन तमाम सुझावों और तकनीकी प्रस्तावों की गहन समीक्षा करने के बाद, नंदन नीलेकणी के नेतृत्व वाली यह उच्चस्तरीय टास्क फोर्स इसी महीने यानी अक्टूबर के अंत तक अपनी अंतिम रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप सकती है. उम्मीद जताई जा रही है कि इस रिपोर्ट के लागू होने के बाद देश की शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं का भविष्य काफी हद तक सुरक्षित और पारदर्शी हो जाएगा.










