झारखंड के मेधावी युवाओं के लिए एक बहुत ही राहत भरी खबर सामने आई है. अब आर्थिक तंगी या पैसों की कमी किसी भी प्रतिभाशाली छात्र के प्रशासनिक सेवा में जाने के सपने के बीच में नहीं आएगी. राज्य सरकार ने प्रदेश के गरीब और जरूरतमंद स्टूडेंट्स के हित में एक बेहद ऐतिहासिक कदम उठाया है, जिसके तहत हर साल सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को निःशुल्क कोचिंग प्रदान की जाएगी.
राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस शानदार पहल के लिए ‘सीएम ट्रेनिंग एंड मेंटरशिप स्कीम फॉर सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन’ का एक खाका तैयार किया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की हरी झंडी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव को अंतिम मुहर के लिए कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा. इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के उन होनहार युवाओं को आगे बढ़ाना है जो साधनों के अभाव में महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस भरने में असमर्थ रहते हैं.
इस महत्वकांक्षी योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ जरूरी पात्रता तय की गई हैं. इसके तहत केवल झारखंड के मूल निवासी छात्र ही आवेदन करने के पात्र होंगे और उनके परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए. इसके अलावा छात्रों के पास वैध स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है और उन्होंने झारखंड के किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से अपनी शुरुआती शिक्षा प्राप्त की हो.
चयनित होने वाले कुल 100 मेधावी स्टूडेंट्स को करीब 13 महीने तक मुफ्त कोचिंग दी जाएगी, जिसमें विषय विशेषज्ञों द्वारा उच्च स्तर का मार्गदर्शन मिलेगा. इतना ही नहीं, संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की परीक्षा पास करने वाले अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों को सरकार की तरफ से दो लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी ताकि उनका हौसला और अधिक बढ़ सके.










