आज के दौर में बदलती जीवनशैली और खानपान की खराब आदतों के कारण कम उम्र की युवतियों और महिलाओं में पीसीओएस (PCOS) तथा फर्टिलिटी से जुड़ी दिक्कतें तेजी से बढ़ रही हैं। हालात इतने बदल चुके हैं कि गर्भधारण में परेशानी आने पर कई महिलाएं सीधे आईवीएफ (IVF) जैसे महंगे और जटिल मेडिकल विकल्पों की तरफ रुख करने लगती हैं। हालांकि, हर महिला को मां बनने के लिए आईवीएफ की आवश्यकता पड़े, ऐसा बिल्कुल जरूरी नहीं है। सही दिनचर्या, पौष्टिक आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और मानसिक तनाव से दूरी बनाकर प्रजनन स्वास्थ्य को प्राकृतिक रूप से बेहतर किया जा सकता है।
हाल ही में आयोजित हुई प्रतिष्ठित इंडिया टुडे हेल्थवेल्थ समिट (HealthWealth Summit) के दौरान महिला स्वास्थ्य और योग के महत्व पर खुलकर चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में ‘योग लव’ की संस्थापक और जानी-मानी योग आचार्य इरा त्रिवेदी ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कई अहम बातें बताईं। उन्होंने कहा कि वह खुद अपनी गर्भावस्था के दौरान लगातार योग अभ्यास करती थीं, जिसने उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों ही मोर्चों पर मजबूत बनाए रखने में बहुत मदद की थी। उनके अनुसार, योग का अभ्यास केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पुरुष हो या महिला, यह हर किसी के शारीरिक और मानसिक संतुलन के लिए बेहद आवश्यक है।
योग एक्सपर्ट ने आगे बताया कि आज की तनावपूर्ण जीवनशैली में महिलाओं को घेरने वाली पीसीओएस जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को भी नियमित योग के जरिए काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। जब शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा होता है, तो मासिक धर्म अनियमित हो जाते हैं और ओव्यूलेशन की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। ऐसे में यदि सही योगासन किए जाएं, तो न सिर्फ मानसिक तनाव घटता है, बल्कि नींद की गुणवत्ता सुधरती है और शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी भी बेहतर होती है, जो कि हार्मोनल विकारों से जूझ रही महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
अक्सर यह देखा गया है कि गर्भावस्था के दौरान कई महिलाएं किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि या कसरत करने से डरती हैं। उन्हें लगता है कि ऐसा करने से उनके होने वाले बच्चे को कोई नुकसान पहुंच सकता है। इस बारे में विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रेग्नेंसी सामान्य है और किसी प्रकार का जोखिम नहीं है, तो डॉक्टर की सलाह के तहत हल्के योगासन बेहद फायदेमंद साबित हो सकते हैं। गर्भावस्था के दिनों में योग करने से थकान, कमजोरी और बेचैनी से राहत मिलती है, साथ ही शरीर का लचीलापन भी बना रहता है जो डिलीवरी के समय मददगार होता है।
अंत में यह समझना भी बेहद जरूरी है कि योग किसी भी गंभीर बीमारी या बांझपन का एकमात्र जादुई इलाज नहीं है। हालांकि यह शरीर को अंदर से स्वस्थ और मजबूत जरूर बनाता है। यदि किसी महिला को प्रजनन से जुड़ी कोई गंभीर चिकित्सीय समस्या है, तो उसे योग के साथ-साथ किसी अच्छे स्त्री रोग विशेषज्ञ से समय पर जांच और उचित इलाज जरूर करवाना चाहिए। प्राकृतिक तरीकों और मेडिकल साइंस के सही तालमेल से मातृत्व सुख के सपने को आसानी से पूरा किया जा सकता है।










