Automobile: देश भर में इन दिनों E20 पेट्रोल को लेकर बहस छिड़ी हुई है। सोशल मीडिया से लेकर आम सड़कों तक चर्चा है कि हाई इथेनॉल ब्लेंडिंग वाली फ्यूल के कारण गाड़ियों का माइलेज घट रहा है और इंजन के पुर्जे खराब हो रहे हैं। इस विवाद के बीच भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने एक बड़ा सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि पुरानी गाड़ियों के मालिकों की समस्याओं को देखते हुए सरकार को दोबारा E10 पेट्रोल उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
आर्थिक सलाहकार ने केवल इंजन की चिंताओं को ही नहीं बल्कि फूड वर्सेस फ्यूल की गंभीर स्थिति पर भी रोशनी डाली है। उनका तर्क है कि इथेनॉल उत्पादन के लिए खेती का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल हो रहा है, जिससे भविष्य में अनाज और पानी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। E20 से आगे बढ़कर E27 या E30 की ओर बढ़ने से पहले सरकार को इस बात का गहन विश्लेषण करना चाहिए कि कहीं हम पेट्रोल की टंकी भरने के चक्कर में लोगों की थाली से अनाज तो कम नहीं कर रहे हैं।
इंजन के खराब होने के दावों पर सफाई देते हुए नागेश्वरन ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर चल रही 30 फीसदी माइलेज घटने की खबरें तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों और अमेरिका की ओक रिज नेशनल लेबोरेटरी के आंकड़ों के अनुसार, E20 के इस्तेमाल से इंजन के कंपोनेंट्स पर कोई असामान्य प्रभाव नहीं पड़ता है। इथेनॉल में ऊर्जा का स्तर कम होने के कारण माइलेज में मामूली 6 से 7 प्रतिशत की गिरावट हो सकती है, लेकिन इसे इंजन की खराबी नहीं कहा जा सकता है।
असली चुनौती भारत के उन करीब 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहनों की है जो BS4 मानक से पहले के हैं। इन पुराने वाहनों में कार्ब्युरेटर का इस्तेमाल होता है, जो इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के प्रति खुद को ढालने में सक्षम नहीं हैं। इसके अलावा, पुराने वाहनों की रबर सील इथेनॉल के संपर्क में आने से जल्दी गल सकती हैं। इतने बड़े स्तर पर पुरानी गाड़ियों को अपग्रेड करना न केवल महंगा है बल्कि एक कठिन और समय लेने वाली प्रक्रिया भी है।
नागेश्वरन का सुझाव है कि E20 के साथ-साथ पेट्रोल पंपों पर E10 का विकल्प भी खुला रहना चाहिए। इससे उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जिनके पास पुरानी गाड़ियां हैं और उन्हें इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल के खराब असर का डर सता रहा है। यह नीतिगत बदलाव न केवल पुराने वाहनों के इंजन की उम्र बढ़ाएगा, बल्कि ग्राहकों के बीच बने हुए डर के माहौल को भी खत्म करने में मदद करेगा, जिससे फ्यूल पॉलिसी और जनता के बीच बेहतर तालमेल बन सके।
Author: Shivam Verma
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