Vinod Tawde: भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में धैर्य और निष्ठा का फल किस तरह मिलता है, इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण विनोद तावड़े का राजनीतिक सफर है। एक ऐसा दौर भी आया था जब महाराष्ट्र की राजनीति में उन्हें पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया था और कयास लगाए जा रहे थे कि उनका सियासी करियर समाप्त हो गया है। साल 2019 में जब उनका विधानसभा का टिकट काटा गया, तो राजनीतिक विश्लेषकों ने मान लिया था कि वे अब हाशिए पर हैं। लेकिन तावड़े ने हार मानने के बजाय संगठन के प्रति अपना समर्पण बनाए रखा और आज वे फिर से पार्टी के सबसे भरोसेमंद चेहरों में से एक बन चुके हैं।
अपनी सांगठनिक क्षमता और मैनेजमेंट स्किल के दम पर विनोद तावड़े ने राष्ट्रीय पटल पर शानदार वापसी की है। इसी का परिणाम है कि उन्हें देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण सियासी राज्य उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। यूपी का प्रभार मिलना न केवल तावड़े के कद को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि बीजेपी आलाकमान उन पर कितना भरोसा करता है। 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी अब उन्हीं के कंधों पर होगी, जहां उन्हें पार्टी को एकजुट करने और जीत दिलाने की राह आसान करनी होगी।
विनोद तावड़े की जड़ें आरएसएस और एबीवीपी से जुड़ी रही हैं, जहां उन्होंने जमीन से जुड़कर राजनीति के दांव-पेच सीखे। अपने शुरुआती दिनों में उन्होंने प्रमोद महाजन और गोपीनाथ मुंडे जैसे दिग्गज नेताओं के मार्गदर्शन में काम किया। 1990 के दशक में महाराष्ट्र भाजपा में सक्रिय होने के बाद, उन्होंने मुंबई अध्यक्ष और फिर कैबिनेट मंत्री के रूप में अपनी धाक जमाई। हालांकि, सत्ता के गलियारों में मिली ऊंचाइयों के बाद उन्हें जिस ‘साइडलाइन’ का सामना करना पड़ा, उसने उन्हें और अधिक अनुशासित और परिपक्व नेता बना दिया।
वर्ष 2019 के झटके के बाद विनोद तावड़े ने कोई शिकायत या बगावत नहीं की, बल्कि खामोशी से अपना काम करते रहे। बीजेपी ने उन्हें राष्ट्रीय सचिव बनाया और फिर धीरे-धीरे वे पार्टी महासचिव के पद तक पहुंचे। हरियाणा और विशेषकर बिहार में प्रभारी के रूप में उन्होंने जो सफलता हासिल की, उसने उनकी लोकप्रियता और कार्यकुशलता को साबित किया। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनावों के दौरान भी उन्होंने कुशल रणनीतिकार की भूमिका निभाई, जिससे वे पार्टी के संकटमोचक के रूप में उभरे।
अब उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी तावड़े के लिए एक बड़ी परीक्षा है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में नई ऊर्जा फूंकना, योगी सरकार और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और जातिगत समीकरणों को साधकर जीत का रास्ता तैयार करना उनकी मुख्य प्राथमिकता होगी। जिस तरह से उन्होंने बीते कुछ वर्षों में एक के बाद एक कठिन चुनौतियों को पार किया है, उसे देखते हुए भाजपा को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं। विनोद तावड़े का यह कमबैक भारतीय राजनीति में किसी भी कार्यकर्ता के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
Author: Shivam Verma
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