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World News: ट्रंप प्रशासन के खनिज समझौतों पर गहराया विवाद, 54 डेमोक्रेट्स ने उठाए गंभीर सवाल

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World News: अमेरिका में सत्ता के गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां ट्रंप प्रशासन द्वारा किए गए ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ यानी महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े समझौतों पर 54 हाउस डेमोक्रेट्स ने अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। इन सांसदों ने प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को पत्र लिखकर इन सौदों में पारदर्शिता की कमी और हितों के टकराव (Conflict of Interest) जैसी गंभीर चिंताओं को उजागर किया है। उनका मानना है कि इन गुप्त समझौतों से व्यक्तिगत लाभ के लिए सरकारी तंत्र का गलत इस्तेमाल हो सकता है।

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सांसदों ने अपनी शिकायत में ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक हालिया रिपोर्ट का जिक्र किया है, जिसमें कजाकिस्तान में हुए खनिजों के सौदों को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके करीबी सहयोगियों के परिवारों से जोड़ा गया है। डेमोक्रेटिक सांसदों का आरोप है कि यदि इन निवेशों पर सही निगरानी नहीं रखी गई, तो इससे अमेरिकी करदाताओं के धन का भारी दुरुपयोग हो सकता है। वे इस बात से चिंतित हैं कि मुनाफा तो निजी कंपनियों की झोली में चला जाएगा, लेकिन किसी भी प्रकार के वित्तीय नुकसान की भरपाई आम जनता को करनी पड़ेगी।

इस विरोध की अगुवाई हाउस नेचुरल रिसोर्सेज कमिटी के प्रमुख जेरेड हफमैन और लिंडा सांचेज समेत कई दिग्गज नेताओं ने की है। पत्र में रो खन्ना और श्री थानेदार जैसे भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने भी हस्ताक्षर किए हैं। इन नेताओं का तर्क है कि हालांकि वे चीन पर निर्भरता कम करने और तकनीक के लिए खनिजों की सप्लाई चेन मजबूत करने के पक्ष में हैं, लेकिन इसे मानवाधिकारों, पर्यावरण सुरक्षा और उचित कानूनी प्रक्रिया के साथ ही किया जाना चाहिए।

डेमोक्रेट्स ने कांगो, जाम्बिया, बांग्लादेश और अर्जेंटीना जैसे देशों के साथ हुए समझौतों को लेकर भी तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि जाम्बिया जैसे देशों पर इन खनिज सौदों को स्वीकार करने के लिए दबाव बनाने के खातिर एचआईवी से जुड़ी मेडिकल सहायता रोकने तक की धमकी दी गई थी। इसके अलावा, कांगो में काम कर रही संदिग्ध पैरामिलिट्री फोर्स को अमेरिकी समर्थन मिलने पर भी सांसदों ने भारी नाराजगी जाहिर की है।

अंत में, इन 54 सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से मांग की है कि वह अपनी इन नीतियों को लेकर पूरी तरह पारदर्शी बने और कांग्रेस की निगरानी प्रक्रिया का सम्मान करे। वे चाहते हैं कि भविष्य में होने वाले किसी भी खनिज समझौते में पर्यावरण और लेबर कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो, ताकि अमेरिका की वैश्विक छवि और वहां के नागरिकों का आर्थिक हित सुरक्षित रह सके।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

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