World News: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने आगामी चुनावों को लेकर ट्रंप प्रशासन को एक बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उस आपातकालीन अपील को साफ तौर पर ठुकरा दिया है, जिसमें मेल-इन बैलेट यानी डाक से मतदान के नियमों में बड़े बदलाव की मांग की गई थी। इस फैसले के बाद अब आगामी मिडटर्म चुनावों की मतदान प्रक्रिया में किसी भी तरह के नए और व्यापक बदलाव लागू नहीं हो सकेंगे, जिससे चुनावी अधिकारियों ने राहत की सांस ली है।
न्यायालय की ओर से जारी किए गए आदेश में स्पष्ट किया गया कि वर्तमान परिस्थितियों और सीमित समय को देखते हुए सरकार के लिए यह साबित करना बेहद कठिन था कि निचली अदालत के प्रतिबंध को पलटने से चुनाव प्रक्रिया बेहतर होगी। कोर्ट का मानना था कि मतदान की प्रक्रिया शुरू होने के इतने करीब आकर नियमों में बदलाव करना पूरी व्यवस्था के लिए अनुचित और व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता था।
गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन की ओर से लाए गए इन प्रस्तावों के तहत मतपत्रों के लिफाफे के डिजाइन में बदलाव, विशेष बारकोड का इस्तेमाल और डाक सेवा के एक नए पोर्टल पर मतदाताओं की गोपनीय जानकारी अपलोड करने जैसे कड़े निर्देश शामिल थे। प्रशासन का तर्क था कि इन नियमों से चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा और पारदर्शिता मजबूत होगी, वहीं राज्यों के चुनाव अधिकारियों ने ऐन वक्त पर इन्हें लागू करने में असमर्थता जताई थी।
देश के कई प्रमुख राज्यों में अनुपस्थित मतदाताओं के लिए बैलेट भेजने की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी थी। ऐसे में चुनाव विशेषज्ञों और स्थानीय अधिकारियों का कहना था कि यदि इस समय नए नियमों को अनिवार्य बनाया जाता, तो लाखों मतदाताओं के मतपत्रों को रद्द होना पड़ता। सुप्रीम कोर्ट के इस हालिया फैसले के बाद अब तय हो गया है कि इस बार के चुनावों में पुराने और स्थापित नियमों के आधार पर ही मतदान संपन्न कराया जाएगा।
Author: Shivam Verma
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