Delhi University: दिल्ली में छात्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) ने एक बार फिर से कॉलेज प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन के प्रतिनिधियों ने हाल ही में जीसस एंड मैरी कॉलेज की प्रिंसिपल मौली केए से मुलाकात की और उन्हें एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के जरिए कॉलेज परिसर और आसपास के बाहरी छात्रों के लिए बेहतर छात्रावास यानी हॉस्टल सुविधाओं की पुरजोर मांग उठाई गई है, ताकि उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं को रहने-सहने में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
यह पूरा अभियान और ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया हाल ही में सत्य निकेतन क्षेत्र में हुई एक गंभीर इमारत ढहने की त्रासदी के बाद और भी ज्यादा तेज हो गई है। केवाईएस की दिल्ली राज्य समिति के सदस्यों का मानना है कि डीयू के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ने वाले हजारों छात्रों के पास आज भी रहने के लिए पर्याप्त और सुरक्षित हॉस्टल नहीं हैं। इस स्थिति के चलते मजबूरन छात्र-छात्राओं को महंगे और असुरक्षित पीजी या किराए के कमरों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जहां उनकी सुरक्षा हमेशा खतरे में रहती है।
ज्ञापन सौंपने के इस कार्यक्रम के दौरान संगठन की महिला कार्यकर्ताओं ने कॉलेज प्रशासन के सामने एक और गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कक्षाओं में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों के जरिए छात्राओं की गतिविधियों पर नजर रखे जाने को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। छात्र संगठनों का कहना है कि इस प्रकार की निगरानी प्रक्रिया पूरी तरह से महिला विरोधी और निंदनीय है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। डीयू के इतिहास में इस तरह का रवैया पहले कभी देखने को नहीं मिला है।
केवाईएस के प्रतिनिधिमंडल ने सिर्फ जीसस एंड मैरी कॉलेज ही नहीं, बल्कि मैत्रेयी कॉलेज की प्रिंसिपल हरितमा चोपड़ा से भी मुलाकात करके उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा है। संगठन के नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे आने वाले दिनों में दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रशासनों के साथ इस मुद्दे को और आक्रामक तरीके से उठाएंगे। उनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाहर से आने वाले हर छात्र को सुरक्षित, किफायती और बुनियादी सुविधाओं से लैस हॉस्टल की सुविधा मिल सके।
छात्र नेताओं का यह भी कहना है कि वे छात्राओं की गोपनीयता के हनन और उनकी निगरानी से जुड़े मामलों पर भी चुप नहीं बैठेंगे। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि कॉलेज प्रशासन ने जल्द ही इन तमाम गंभीर समस्याओं पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो छात्रों का यह असंतोष एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। फिलहाल, केवाईएस के इस कदम से दिल्ली विश्वविद्यालय के शैक्षणिक गलियारों में हलचल मच गई है और प्रशासन पर दबाव बढ़ना शुरू हो गया है।
Author: Shivam Verma
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