World News: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने देश में बढ़ती महंगाई के दबाव के बीच एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ब्याज दरों को 3.5 से 3.75 फीसदी के दायरे में स्थिर रखने का फैसला किया है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की हालिया बैठक में दरों को न बदलने का रुख अपनाया गया, हालांकि इस फैसले को लेकर कमेटी के सदस्यों के बीच काफी मतभेद देखे गए। जहां अधिकांश सदस्यों ने वर्तमान दर को बनाए रखने का समर्थन किया, वहीं कुछ सदस्यों का मानना था कि दरों में बढ़ोतरी जरूरी थी।
इस फैसले का सीधा असर अमेरिकी शेयर बाजार पर देखने को मिला है। ब्याज दरों में राहत न मिलने और नीतिगत अनिश्चितता के चलते निवेशकों में घबराहट फैल गई, जिसके कारण डॉव जोन्स में 1,153 अंकों यानी लगभग 2.19 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह, टेक-हैवी एनएएसडीएक्यू इंडेक्स भी 1.74 फीसदी नीचे लुढ़क गया, जिससे वैश्विक बाजार में भी चिंता का माहौल है।
फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने इस स्थिति को एक चुनौतीपूर्ण दौर बताते हुए कहा कि फिलहाल प्राथमिक लक्ष्य महंगाई को दो फीसदी के स्तर पर लाना है। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस निर्णय से खुश नहीं हैं। ट्रंप का मानना है कि ब्याज दरों को ऊपर रखना राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम हो सकता है, जबकि वह खुद दरों में कटौती के पक्ष में रहे हैं। महंगाई का मुख्य कारण खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके नकारात्मक प्रभाव को माना जा रहा है।
मौजूदा आर्थिक स्थिति में फेडरल रिजर्व के सामने रोजगार बाजार को संभालने और मूल्य स्थिरता बनाए रखने की दोहरी चुनौती है। वार्श ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुसार कड़े निर्णय लेने से फेड पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने महंगाई और बेरोजगारी के बीच संतुलन साधने के अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि सही समय पर उचित कदम उठाए जाएंगे।
अगले कुछ महीनों में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है, क्योंकि सितंबर में फेडरल रिजर्व की अगली बैठक निर्धारित है। यह बैठक अमेरिका में होने वाले मिड-टर्म चुनावों से पहले की अंतिम बैठक होगी, जो बाजार और राजनीतिक गलियारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। तब तक निवेशकों की नजरें कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स की अगली रिपोर्ट और आर्थिक सुधारों के संकेतों पर टिकी रहेंगी।
Author: Shivam Verma
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