Home » दिल्ली » Anti Paper Leak Bill: परीक्षाओं में सेंधमारी रोकने के लिए सरकार का बड़ा कदम, जानें नए एंटी-पेपर लीक कानून में क्या हुआ बदलाव?

Anti Paper Leak Bill: परीक्षाओं में सेंधमारी रोकने के लिए सरकार का बड़ा कदम, जानें नए एंटी-पेपर लीक कानून में क्या हुआ बदलाव?

Facebook
X
WhatsApp

Anti Paper Leak Bill: हाल के समय में नीट-यूजी 2026 जैसी परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक मामलों ने छात्रों के भविष्य पर गंभीर संकट पैदा कर दिया था। इस स्थिति को देखते हुए और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को फिर से बहाल करने के लिए केंद्र सरकार ने अपने 2024 के कानून में संशोधन करने का निर्णय लिया है। लोकसभा में पेश किया गया यह नया विधेयक 2026 का संशोधन कानून है, जो सरकारी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में धांधली करने वालों के खिलाफ पहले से कहीं अधिक कठोर दंड के प्रावधान करता है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

दो साल पहले बने कानून में बदलाव की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि पुराने प्रावधान परीक्षा माफियाओं पर लगाम कसने में पूरी तरह प्रभावी साबित नहीं हो रहे थे। नए संशोधन के तहत पेपर लीक में शामिल व्यक्तियों को 5 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना भरने का प्रावधान है। वहीं, संगठित गिरोहों यानी परीक्षा माफियाओं के लिए यह जुर्माना राशि 10 करोड़ रुपये तक पहुंचाई गई है, ताकि ऐसे अपराधियों में कानून का डर कायम हो सके।

इस नए कानून की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी इसके तहत होने वाली त्वरित जांच प्रक्रिया है। अब सरकार जरूरत पड़ने पर मामलों की जांच स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सौंप सकेगी, जिसे अपनी जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इसके अलावा, मुकदमों के जल्द निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया जाएगा, जहां हर दिन सुनवाई होगी और चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का कड़ा लक्ष्य रखा गया है।

परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों पर भी अब सरकार का शिकंजा और सख्त हो गया है। अगर किसी एजेंसी की संलिप्तता धांधली में पाई जाती है, तो उस पर 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा और उसे आठ साल के लिए किसी भी सार्वजनिक परीक्षा के आयोजन से प्रतिबंधित (डिबार) कर दिया जाएगा। कंपनी के उच्च अधिकारियों, निदेशकों और प्रबंधकों को भी निजी तौर पर जवाबदेह ठहराते हुए 10 साल तक की कैद का प्रावधान जोड़ा गया है।

सरकार का यह संशोधित विधेयक यूपीएससी, एसएससी, आरआरबी, एनटीए और बैंकिंग परीक्षाओं सहित सभी केंद्रीय सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होगा। विपक्ष की ओर से परीक्षा व्यवस्था की खामियों पर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे, जिसके जवाब में सरकार अब एक फुल-प्रूफ और पारदर्शी व्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस नए कानूनी ढांचे का उद्देश्य केवल सजा देना ही नहीं, बल्कि युवाओं के भरोसे को फिर से जीतना है ताकि उनकी मेहनत का सही परिणाम मिल सके।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

Description

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ताजा खबरें