Ayodhya News: अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह लगातार सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे बृजभूषण शरण सिंह का बयान भी चर्चा का विषय बन गया है।
बृजभूषण शरण सिंह ने मामले पर सीधे तौर पर कुछ कहने से परहेज किया, लेकिन उनके बयान ने कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया। उन्होंने कहा कि यदि वह सच बोलेंगे तो बड़ी परेशानी में पड़ जाएंगे। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विभिन्न अर्थ निकाले जा रहे हैं।
‘सच बोलने की अभी हमारी हिम्मत नहीं है’
दिल्ली में करीब दस दिनों के प्रवास के बाद अपने गृह जनपद गोंडा पहुंचे बृजभूषण शरण सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “अगर मैं सच बोलूंगा तो बहुत परेशानी में आ जाऊंगा। वह बहुत बड़े लोग हैं। सच बोलने की अभी हमारी हिम्मत नहीं है। समय आने पर सच बोलूंगा।”
अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की प्रसिद्ध चौपाई “जिमि दसनन महुं जीभ बिचारी, सुनहु पवनसुत रहनि हमारी” का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह चौपाई विभीषण द्वारा बजरंगबली से कही गई थी, जिसमें अपनी स्थिति को 32 कठोर दांतों के बीच स्थित कोमल जीभ के समान बताया गया है।
बातचीत के दौरान जब उनसे राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के संबंध में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उस विषय पर बोलना उनका विषय नहीं है।
पूर्व लेखा प्रभारी के आरोपों से मचा हड़कंप
राम मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह के दावों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। महिपाल सिंह ने आरोप लगाया है कि चढ़ावे में कई वर्षों से चोरी हो रही थी। उनका दावा है कि इस संबंध में उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को भी जानकारी दी थी।
महिपाल सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने के बाद नोटों की गिनती वाले कमरे के कई महीनों के सीसीटीवी फुटेज डिलीट करा दिए गए। उनका कहना है कि मामले में कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही उनके दायित्व से हटा दिया गया।
नोटों की गिनती प्रक्रिया को लेकर लगाए गंभीर आरोप
विश्व हिंदू परिषद से जुड़े महिपाल सिंह ने बताया कि मंदिर में चढ़ावे के रूप में प्राप्त नोटों की गिनती के लिए 14 लोगों की ड्यूटी लगाई गई थी। उनके अनुसार, बैंक के दो अधिकारी प्रतिदिन नोटों की गड्डियों को बक्सों में रखकर ले जाते थे। इसके लिए एक विशेष कक्ष निर्धारित था, जहां सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए थे।
महिपाल सिंह के अनुसार, गिनती के दौरान पहले नोटों की गड्डियां तैयार की जाती थीं और फिर दस-दस गड्डियों को एक साथ बांधकर बक्सों में रखा जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक अधिकारी कई बार दस गड्डियों की जगह 12 या 13 गड्डियां रख देते थे, जबकि वाउचर में केवल दस गड्डियों का ही उल्लेख किया जाता था। उनका दावा है कि बक्सों को बाहर ले जाने के बाद नोटों का बंटवारा किया जाता था।
उन्होंने बताया कि एक बार संदेह होने पर उन्होंने बक्से खुलवाकर दोबारा गिनती कराई, जिसमें पांच लाख रुपये अधिक पाए गए। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत की, लेकिन कार्रवाई होने के बजाय उन्हें उनके पद से हटा दिया गया।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच चर्चा में मामला
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर उठे आरोपों ने राजनीतिक माहौल को भी गर्मा दिया है। एक ओर विपक्षी दल इस मामले को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बृजभूषण शरण सिंह के बयान ने विवाद को और अधिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह के दावों और उन पर उठ रहे सवालों के बीच यह मामला अब व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन चुका है।











