Bulandshahr News: भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए डीआईजी कलानिधि नैथानी ने अपनी ज़ीरो टॉलरेंस नीति के तहत इंस्पेक्टर नीरज मलिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। यह कार्रवाई शिकायतकर्ता द्वारा लगातार की गई शिकायतों और जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद की गई।
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता ने दो बार बुलंदशहर शहर के पुलिस अधीक्षक डीके सिंह को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। आरोप है कि पुलिस अधीक्षक ने मामले में सीधे कार्रवाई करने के बजाय उसे क्षेत्राधिकारी (सीओ) के पास भेज दिया और प्रकरण को टालने का प्रयास किया।
सीओ की जांच में छह लाख रुपये लेने की पुष्टि
सीओ द्वारा की गई जांच में शिकायत को सही पाया गया। जांच रिपोर्ट में इंस्पेक्टर नीरज मलिक द्वारा छह लाख रुपये लेने की पुष्टि होने की बात सामने आई। इसके बाद भी तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की गई। बताया गया है कि इसी मामले में इंस्पेक्टर नीरज मलिक को लगभग ढाई महीने पहले निलंबित किया जा चुका था। उनके विरुद्ध विभागीय जांच भी चल रही है तथा 14(1) के तहत कार्रवाई प्रचलित है। इस प्रावधान में सीधे बर्खास्तगी का नियम है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी कलानिधि नैथानी ने भ्रष्टाचार, रंगदारी और वसूली के आरोपों की जांच पुलिस अधीक्षक बुलंदशहर शहर को न देकर एसपी क्राइम को सौंपी थी।बाद में जब शिकायतकर्ता स्वयं डीआईजी कलानिधि नैथानी से मिला, तब उन्होंने जांच पुलिस अधीक्षक को न देकर सीओ सिकंदराबाद से कराई। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद भी कार्रवाई लंबित रही।
दो बार निर्देश देने के बाद डीआईजी ने स्वयं दर्ज कराई एफआईआर
मामले में आवश्यक कार्रवाई नहीं होने पर डीआईजी कलानिधि नैथानी ने दो बार निर्देश दिए। अंततः उन्होंने स्वयं पहल करते हुए इंस्पेक्टर नीरज मलिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के मामलों में सख्त रुख अपनाने की नीति के तहत की गई है।
Author: Shivam Verma
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