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E20 Petrol का इस्तेमाल कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं, जानिए इसके पीछे का लंबा संघर्ष और सरकारी तैयारी

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E20 Petrol: पेट्रोलियम मंत्रालय ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि भारत में ई20 (20 फीसदी एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को अपनाना रातों-रात लिया गया कोई फैसला नहीं है। इसके पीछे दो दशकों से अधिक का गहन शोध, तकनीकी परीक्षण और विशेषज्ञों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श की एक लंबी प्रक्रिया शामिल है। मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग की शुरुआत काफी पहले हो गई थी, जिसे अब एक व्यवस्थित मिशन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।

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आधिकारिक बयान के अनुसार, एथेनॉल मिश्रण का सफर साल 2001 में एक पायलट प्रोजेक्ट के साथ शुरू हुआ था। साल 2004 में इसे औपचारिक पहचान मिली और 2006 तक ई5 यानी पांच फीसदी मिश्रण को कई राज्यों में लागू कर दिया गया था। हालांकि, 2014 तक यह मिश्रण लक्ष्य के मुकाबले काफी पीछे यानी केवल 1.5 फीसदी के आसपास ही सिमटा हुआ था। मुख्य चुनौती तब एथेनॉल के पर्याप्त उत्पादन और सप्लाई चेन को मजबूत करने की थी, जिस पर सरकार ने बाद के वर्षों में विशेष ध्यान दिया।

मई 2018 में ‘बायोफ्यूल पर राष्ट्रीय नीति’ लागू होने के बाद, सरकार ने एथेनॉल उत्पादन के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने पर जोर दिया। इसके लिए पेट्रोलियम मंत्रालय, कृषि विभाग, सड़क परिवहन और भारी उद्योग मंत्रालय सहित कई अन्य विभागों ने मिलकर काम किया। इस प्रयास का ही नतीजा है कि आज देश न केवल एथेनॉल का उत्पादन बढ़ाने में सक्षम हुआ है, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर भी भारत ने बड़ी कामयाबी हासिल की है।

मंत्रालय ने ई20 के सुरक्षित होने का प्रमाण देते हुए मारुति सुजुकी और हीरो मोटोकॉर्प जैसी ऑटोमोबाइल कंपनियों के आंकड़ों का हवाला दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लाखों पुरानी और नॉन-ई20 सर्टिफाइड गाड़ियों की सर्विसिंग के बावजूद, इनमें किसी भी प्रकार के असामान्य जंग या पुर्जों के खराब होने की शिकायत नहीं पाई गई है। यह साबित करता है कि ई20 ईंधन कड़े बीआईएस मानकों का पालन करता है और पूरी तरह से सुरक्षित है।

अंत में, सरकार ने जनता से सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक अफवाहों से दूर रहने की अपील की है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ कहा है कि ईंधन की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। इसके लिए राज्यों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे सप्लाई चेन की नियमित जांच करें और यदि कहीं भी मानकों में चूक पाई जाती है, तो वहां जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

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