EPFO Update: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने नई कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026 को अधिसूचित कर दिया है, जिसके तहत ईपीएफ योगदान के नियमों में अहम बदलाव किए गए हैं। अब 15,000 रुपये की वेतन सीमा से अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए 1,800 रुपये से ज्यादा का पीएफ कंट्रीब्यूशन अनिवार्य नहीं रह गया है।
नई व्यवस्था के अनुसार, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में अनिवार्य अंशदान अब केवल सरकार द्वारा तय की गई वेतन सीमा (15,000 रुपये) तक ही सीमित रहेगा। इसका मतलब है कि अब 1,800 रुपये से अधिक की राशि का योगदान करना पूरी तरह से कर्मचारी और नियोक्ता की आपसी सहमति पर निर्भर करेगा। यदि कोई कर्मचारी अपनी स्वेच्छा से इससे ज्यादा का पीएफ कटाना चाहता है, तो वह ऐसा कर सकता है, लेकिन यह अब बाध्यकारी नहीं होगा।
पुराने नियमों की बात करें तो पहले कर्मचारी योजना में शामिल होने के बाद अपने वास्तविक मूल वेतन के आधार पर अंशदान करते थे, जिसमें नियोक्ता भी समान राशि जमा करता था। लेकिन अब नई अधिसूचना के तहत, किसी भी सदस्य का अनिवार्य कंट्रीब्यूशन सरकार द्वारा निर्धारित सैलरी लिमिट तक ही सीमित कर दिया गया है। इससे उन कर्मचारियों को राहत मिल सकती है जो अपनी टेक-होम सैलरी को बढ़ाना चाहते हैं।
हालांकि, नोटिफिकेशन में पेंशन फंड (EPS) को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। जिन मामलों में कर्मचारी पेंशन योजना-1995 के तहत उच्च वेतन पर योगदान की अनुमति है, वहां नियोक्ता वेतन सीमा से अधिक हिस्से पर भी पेंशन फंड में अपना योगदान जारी रख सकते हैं। इस बदलाव का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा और कर्मचारी के वेतन हाथ में आने वाली राशि के बीच एक बेहतर संतुलन बनाना है।
फिलहाल इस बदलाव के बाद कर्मचारी और नियोक्ता के पास यह विकल्प खुल गया है कि वे भविष्य निधि में अपनी बचत को किस स्तर तक ले जाना चाहते हैं। श्रम मंत्रालय की ओर से आए इस ताज़ा अपडेट के बाद कंपनियों को अब अपने पेरोल सिस्टम में भी बदलाव करने पड़ सकते हैं। इस नए नियम के लागू होने से वेतनभोगी वर्ग की मासिक आय और बचत की रणनीति पर सीधा असर पड़ना तय है।
Author: Shivam Verma
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