Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश में मॉनसून ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार तड़के किन्नौर जिले के चोलिंग इलाके में अचानक बादल फटने से बड़ी आपदा आ गई। भारी बारिश और मलबे के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई थी। इस प्राकृतिक आपदा के चलते सड़क के एक बड़े हिस्से पर चट्टानें और कीचड़ का अंबार जमा हो गया, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों की मुश्किलें काफी बढ़ गईं।
इस हादसे में मलबे की चपेट में आने से दो वाहन बुरी तरह दब गए। गनीमत यह रही कि वाहनों में सवार लोग समय रहते सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे, जिससे एक बड़ा जानी नुकसान टल गया। हालांकि, इन गाड़ियों में रखा सामान मलबे और पानी के तेज बहाव में बह गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और राहत बचाव दल ने तुरंत मोर्चा संभाला और पोकलेन मशीनों के जरिए मलबे को हटाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया गया।
लगातार मशक्कत के बाद प्रशासन ने शिमला-किन्नौर राष्ट्रीय राजमार्ग-5 को यातायात के लिए बहाल कर दिया है। मार्ग खुलने से राहगीरों ने राहत की सांस ली है, लेकिन अभी भी पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और बादल फटने का खतरा बना हुआ है। जिला प्रशासन ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को चेतावनी दी है कि वे मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही यात्रा करें और जोखिम भरे इलाकों में जाने से बचें।
किन्नौर के अन्य हिस्सों से भी नुकसान की खबरें सामने आई हैं। रिब्बा खड्ड में अचानक आई बाढ़ के कारण क्षेत्र में दहशत का माहौल रहा। बाढ़ का पानी और मलबा रिब्बा से कंडे को जोड़ने वाले मुख्य संपर्क मार्ग पर आ गया, जिससे सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है। ग्रामीणों को सुबह अपने वाहनों को मलबे से बाहर निकालने के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। फिलहाल, प्रशासन स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। कांगड़ा और मंडी जैसे जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जबकि शिमला, कुल्लू और ऊना के लिए येलो अलर्ट घोषित किया गया है। आने वाले दिनों में भूस्खलन की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और पहाड़ी रास्तों पर अनावश्यक सफर से बचने की सख्त हिदायत दी है।
Author: Shivam Verma
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