देश भर में मानसून ने दस्तक दे दी है, जिससे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों को चिलचिलाती गर्मी और चिपचिपाती उमस से बड़ी राहत मिली है। दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और हरियाणा में बारिश के चलते तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक दिल्ली में तेज हवाओं और मध्यम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है, जिससे लोगों को काफी सुकून महसूस हो रहा है।
हालांकि, मानसून का यह स्वागत कई राज्यों के लिए तबाही लेकर आया है। जम्मू-कश्मीर में लगातार दूसरे दिन बादल फटने की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण बदरीनाथ हाईवे घंटों तक बंद रहा, जिससे करीब आठ हजार श्रद्धालु बीच रास्ते में ही फंस गए। हाईवे पर मलबे के ढेर लगने के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी, जिसे घंटों की मशक्कत के बाद बहाल किया जा सका।
पहाड़ी राज्यों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बनी हुई है। हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण करीब 46 सड़कों पर आवाजाही पूरी तरह ठप है। चंबा जिले में अचानक आई बाढ़ के चलते एक लकड़ी का पुल बह गया, जिससे वहां मौजूद श्रद्धालु संकट में पड़ गए। राज्य में मूसलाधार बारिश ने न केवल यातायात को प्रभावित किया है, बल्कि सैकड़ों बिजली ट्रांसफार्मरों को भी नुकसान पहुँचाया है, जिससे कई इलाकों में अंधेरा छा गया है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देशभर के कई राज्यों के लिए अलर्ट जारी किया है। गुजरात, कोंकण-गोवा और मध्य महाराष्ट्र जैसे इलाकों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है, जहाँ 200 मिमी से अधिक बारिश होने की संभावना है। दूसरी ओर, असम में बाढ़ की स्थिति में मामूली सुधार हुआ है, लेकिन धेमाजी और डिब्रूगढ़ जैसे जिलों में अभी भी हजारों लोग जलभराव और फसल बर्बादी की मार झेल रहे हैं।
मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में राजस्थान, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भी भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। प्रशासन ने लोगों को एहतियात बरतने और नदी-नालों के आसपास न जाने की सलाह दी है। देश के विभिन्न हिस्सों में जारी यह मानसून का रौद्र रूप प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, जहाँ राहत और बचाव कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।
Author: Shivam Verma
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