क्रिकेट का खेल अब सिर्फ मैदान पर चौके-छक्के लगाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा मैनेजमेंट और एक्सपर्ट्स का सिस्टम काम करता है. साल 1983 के वर्ल्ड कप दौर से लेकर आज के आधुनिक क्रिकेट युग तक में बहुत बड़ा बदलाव आ चुका है. उस समय जहां सिर्फ एक टीम मैनेजर पूरी व्यवस्था संभालते थे, वहीं आज मैदान पर उतरने वाले ग्यारह खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए विशेषज्ञों की एक पूरी फौज पर्दे के पीछे लगातार मेहनत करती है.
हाल ही में बीसीसीआई द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो में आधुनिक भारतीय क्रिकेट टीम के इसी हैरान कर देने वाले सेटअप की पूरी झलक देखने को मिली है. मुख्य कोच गौतम गंभीर अकेले पूरी टीम की नैया नहीं पार लगाते, बल्कि उनके साथ कुल 17 सदस्यों का एक मजबूत सपोर्ट स्टाफ मौजूद रहता है. इस सपोर्ट स्टाफ में बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक, गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल, स्पिन गेंदबाजी कोच साईराज बहुतुले और फील्डिंग कोच सुभदीप घोष जैसे बड़े नाम शामिल हैं जो खिलाड़ियों की तकनीक को निखारने का काम करते हैं.
मैदान पर बेहतरीन प्रदर्शन के अलावा खिलाड़ियों की फिटनेस और रिकवरी पर भी बहुत बारीकी से काम किया जाता है. इस लिस्ट में स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच एड्रियन ले रूक्स, टीम डॉक्टर डॉ. चार्ल्स मिंज, हेड फिजियोथेरेपिस्ट कमलेश जैन, फिजियोथेरेपिस्ट योगेश परमार और दो अनुभवी मसाजर नंदन माजी व चेतन कुमार शामिल हैं. ये सभी मिलकर खिलाड़ियों को थकान से उबारने और चोटिल होने से बचाने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं ताकि लंबे दौरों पर भी खिलाड़ियों की फिटनेस बनी रहे.
सिर्फ कोचिंग और मेडिकल स्टाफ ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों को नेट्स में अभ्यास कराने के लिए दयानंद गरानाई, उदेनाका नुवान और दिग्गज थ्रोडाउन स्पेशलिस्ट राघवेंद्र दुगी जैसे ट्रेनिंग असिस्टेंट भी इस फौज का हिस्सा हैं. इसके अलावा ऑपरेशन मैनेजर सुमीत, लॉजिस्टिक्स मैनेजर खाजा मुबास्सिरुद्दीन और परफॉर्मेंस एनालिस्ट हरि प्रसाद मोहन टीम की रणनीति और यात्रा को सुगम बनाते हैं. इन सभी प्रोफेशनल्स का सामूहिक प्रयास ही आज टीम इंडिया को विश्व स्तर पर अजेय और मजबूत बनाता है.










