इजरायल की राजनीति में हालिया संसदीय चुनावों के बाद घमासान मच गया है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने अरब राजनीतिक दलों पर मतदान के दौरान गंभीर धांधली और वोट चोरी करने के बड़े आरोप लगाए थे. हालांकि, इजरायली पुलिस ने इन तमाम दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि उनके पास इन आरोपों की पुष्टि करने के लिए कोई ठोस सबूत या खुफिया जानकारी उपलब्ध नहीं है.
लिखित शिकायतों में लिकुड पार्टी ने दावा किया था कि अरब दलों ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए रिश्वतखोरी, धमकियों, हिंसा और प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया. पार्टी का कहना था कि चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को डराने-धमकाने और वोटों की गिनती में हेरफेर जैसी घटनाएं हुई थीं, जिसके समर्थन में वे सैकड़ों गवाहियां और दस्तावेज अधिकारियों के सामने पेश करेंगे.
पुलिस और केंद्रीय चुनाव समिति ने इन शुरुआती दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस साल मतदान के दौरान नियमों के उल्लंघन या गड़बड़ी की घटनाएं पिछले चुनावों के मुकाबले काफी कम थीं. चुनाव अधिकारियों ने साफ किया कि शुरुआती स्तर पर बड़े पैमाने पर वोट चुराए जाने जैसे किसी बड़े षड्यंत्र के प्रमाण नहीं मिले हैं, हालांकि प्राप्त हुई सभी शिकायतों की अभी भी बारीकी से समीक्षा की जा रही है.
इस बीच, इजरायली चुनाव आयोग और शीर्ष अधिकारियों ने एक नए और संवेदनशील पहलू पर जांच के आदेश दिए हैं. खुफिया एजेंसी शिन बेट के प्रमुख डेविड जिनी को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे चुनाव में विदेशी फंडिंग के संभावित इस्तेमाल और वोट खरीदे जाने के मामलों की गहराई से जांच करें. अंदेशा जताया जा रहा है कि मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े विदेशी फंड का इस्तेमाल करके अरब समुदाय के मतदाताओं को भारी संख्या में मतदान के लिए प्रभावित किया गया था.
बता दें कि इजरायली संसद नेसेट के हालिया चुनावों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत मिलता नजर नहीं आ रहा है, जिसके चलते वहां राजनीतिक गतिरोध की स्थिति बनी हुई है. ऐसे माहौल में अरब पार्टियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए करीब 19 सीटें हासिल की हैं, जो भविष्य की गठबंधन सरकार बनाने में निर्णायक साबित हो सकती हैं. इसी राजनीतिक समीकरण के बीच उठे धांधली के आरोपों और शिन बेट की आगामी जांच रिपोर्ट पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं.










