GDP Growth: भारत की आर्थिक विकास दर यानी जीडीपी को लेकर देश में इन दिनों तीखी बहस छिड़ गई है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 7.8% दर्ज की गई है, जिसे सरकार देश की मजबूत होती अर्थव्यवस्था का बड़ा संकेत बता रही है. हालांकि, इस शानदार आंकड़े के सामने आने के बाद से ही इसके कैलकुलेशन के तरीकों और आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं.
पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने जीडीपी के इन आंकड़ों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. आलोचकों का तर्क है कि सरकार ने बेस ईयर और आंकड़ों जुटाने के तरीके में बदलाव करके ग्रोथ को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है. उनका दावा है कि यदि पुराने मानकों के हिसाब से गणना की जाए, तो यह विकास दर का आंकड़ा बहुत कम नजर आएगा और आम लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार से जुड़े दावों की पोल खुल जाएगी.
इन सभी आलोचनाओं और तीखे सवालों के बीच वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने खुलकर सरकार का पक्ष लिया है. उन्होंने जीडीपी की नई सीरीज पर सवाल उठाने वालों को आड़े हाथों लेते हुए उनके दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिना पूरी जानकारी के पुराने और नए आंकड़ों की तुलना करना बिल्कुल गलत है और यह केवल भ्रम फैलाने का प्रयास है.
नीलकंठ मिश्रा ने केवल जीडीपी का बचाव नहीं किया, बल्कि देश की मजबूत आर्थिक गतिविधियों के कई पुख्ता सबूत भी पेश किए हैं. उन्होंने बताया कि देश में कारों, दोपहिया वाहनों और कमर्शियल गाड़ियों की बिक्री में भारी इजाफा हुआ है. इसके अलावा बैंक लेंडिंग, टैक्स कलेक्शन और निर्माण क्षेत्र के आंकड़े भी यह साबित करते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था सही दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है और निजी निवेश में भी सुधार देखा जा रहा है.
वर्ल्ड बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी माना कि अर्थव्यवस्था में अभी कुछ कमियां जरूर बाकी हैं और वास्तविक वेतन में वृद्धि की रफ्तार थोड़ी धीमी है, जिसे ठीक होने में कुछ समय लग सकता है. इसके बावजूद उन्होंने भरोसा जताया है कि आने वाले दिनों में भारत की औसत जीडीपी ग्रोथ सात प्रतिशत से ऊपर बनी रहेगी और अनुकूल नीतियों के दम पर यह करीब साढ़े सात प्रतिशत तक पहुंच सकती है.
Author: Shivam Verma
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