West Bengal: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों उथल-पुथल का दौर लगातार जारी है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने अभिषेक बनर्जी के दफ्तर में हुई तोड़फोड़ की घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि किसी भी राजनीतिक कार्यालय में इस प्रकार की तोड़-फोड़ की घटनाएं सामने आती हैं, तो यह सीधे तौर पर कानून और व्यवस्था से जुड़ा हुआ एक गंभीर मामला बन जाता है।
आईएएनएस के साथ हुई एक खास बातचीत के दौरान दिलीप घोष ने पुलिस प्रशासन और व्यवस्था पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि ऐसी अप्रिय घटनाओं के बाद प्रभावित पक्षों को तुरंत पुलिस की शरण लेनी चाहिए और औपचारिक शिकायत दर्ज करानी चाहिए। उनका मानना है कि विरोध प्रदर्शन का रास्ता चुनने के बजाय पुलिस और न्याय प्रणाली पर भरोसा दिखाना बेहद जरूरी है ताकि दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जा सके।
इसके साथ ही दिलीप घोष ने विपक्षी दलों और पार्टी कार्यालयों के विवाद पर भी गहरी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने किसी भी अन्य दल के दफ्तरों पर जबरन कब्जा नहीं किया है। उनके अनुसार, कई राजनीतिक कार्यालय सरकारी जमीन या फिर किसी अन्य व्यक्ति की निजी संपत्ति पर अवैध रूप से बनाए गए थे, जिन्हें संबंधित मालिकों द्वारा कानूनी नोटिस देकर खाली करवाया गया है।
राज्य की मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि पिछले डेढ़ दशक के शासनकाल में जनता की बुनियादी समस्याओं का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। इसके विपरीत, राज्य में लगातार नई परेशानियों को जन्म दिया गया है जिससे आम जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में राज्य की जनता को इन पुरानी समस्याओं से राहत जरूर मिलेगी।
अंत में दिलीप घोष ने यह भी दावा किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में घिरे कई स्थानीय नेता, पंचायत प्रधान और विधायक अब कानूनी कार्रवाई के डर से राज्य छोड़कर भाग चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस ऐसे तमाम भ्रष्ट लोगों की तलाश कर रही है और उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा किया जाएगा, चाहे वे छिपने के लिए कहीं भी चले जाएं।











