Technology News: हाल ही में मेरठ के हस्तिनापुर से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां यूट्यूब पर ‘सीक्रेट हाउस गेम’ देखने के बाद दो बच्चे घर से गायब हो गए. बच्चों का मकसद केवल 24 घंटे तक छिपने के उस चैलेंज को पूरा करना था जिसे उन्होंने वीडियो में देखा था. गनीमत रही कि पुलिस ने समय रहते बच्चों को ढूंढ लिया, लेकिन यह घटना इस बात की चेतावनी है कि इंटरनेट पर मौजूद कंटेंट बच्चों के कोमल दिमाग पर कितना गहरा असर डाल रहा है. मनोरंजन के नाम पर शुरू होने वाले ये चैलेंज धीरे-धीरे बच्चों के लिए एक साइलेंट किलर साबित हो रहे हैं.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे कई खतरनाक ट्रेंड्स पहले भी देखे जा चुके हैं, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा की है. ‘ब्लैकआउट चैलेंज’ जैसे ट्रेंड्स में बच्चों को सांस रोककर बेहोश होने के लिए उकसाया जाता है, जो दिमाग तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद कर जानलेवा बन सकता है. इसके अलावा, ‘डीवियस लिक्स’ जैसे चैलेंज में स्कूल या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और चोरी करने की होड़ मची थी, जिससे बच्चों का भविष्य तक खराब हो सकता है. ये ट्रेंड्स साबित करते हैं कि ऑनलाइन दुनिया में वायरल होने की चाहत में बच्चे अपनी सुरक्षा और नैतिकता को भूल रहे हैं.
इतना ही नहीं, ‘बर्ड बॉक्स’ चैलेंज जैसे ट्रेंड्स में आंखों पर पट्टी बांधकर स्टंट करने जैसी गतिविधियां शामिल थीं, जो गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बनीं. सॉल्ट एंड आइस चैलेंज या आग से जुड़े खतरों वाले प्रयोग बच्चों की त्वचा और शरीर को स्थायी नुकसान पहुंचा सकते हैं. इन वीडियो को बनाने वाले अक्सर ये नहीं बताते कि ये चीजें कितनी दर्दनाक हो सकती हैं. बच्चे बिना किसी पूर्व तैयारी या खतरे का आकलन किए केवल दूसरों को देखकर इनकी नकल करने लगते हैं, जो उनके स्वास्थ्य और जीवन के लिए बेहद जोखिम भरा है.
माता-पिता के लिए यह समय सतर्क रहने का है. केवल बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जानना जरूरी है कि वे इंटरनेट पर क्या देख रहे हैं. पेरेंटल कंट्रोल एप्स का उपयोग करें और बच्चों के साथ इंटरनेट पर मौजूद खतरों को लेकर खुलकर चर्चा करें. उन्हें सिखाएं कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चीज सुरक्षित नहीं होती. मनोरंजन के लिए इंटरनेट का उपयोग करें, लेकिन किसी भी ‘चैलेंज’ का हिस्सा बनने से पहले बड़ों की सलाह लेना क्यों जरूरी है, यह बच्चों को समझाना आपकी जिम्मेदारी है.
डिजिटल युग में बच्चों को पूरी तरह से इंटरनेट से दूर रखना नामुमकिन है, इसलिए डिजिटल साक्षरता ही एकमात्र समाधान है. बच्चों के मन में यह स्पष्ट करें कि असली दुनिया की सुरक्षा किसी भी ऑनलाइन व्यूज या लाइक्स से कहीं ज्यादा कीमती है. अगर आपका बच्चा किसी ऐसे अजीबोगरीब चैलेंज के बारे में बात करता है, तो तुरंत उसका कारण समझें और उसे सुरक्षित विकल्पों की ओर प्रेरित करें. सतर्कता और सही मार्गदर्शन ही आपके बच्चे को इन घातक ऑनलाइन जाल से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है.











