Science: लद्दाख के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में रहने वाले किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अब ग्लेशियर से पिघलकर व्यर्थ बह जाने वाला पानी सीधे खेतों की प्यास बुझाएगा। इस अनूठी पहल से लेह के 12 गांवों के किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है, जिससे लंबे समय से पानी की किल्लत झेल रहे क्षेत्रों में उम्मीद की नई किरण जगी है।
प्रशासन की ओर से किए गए प्रयासों के तहत, स्टोक गांव के नाले से निकलने वाले ग्लेशियर के पानी को 43 किलोमीटर लंबी इगू-पेह सिंचाई नहर के जरिए खेतों तक पहुंचाया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, इस नहर में हर रोज करीब 9 करोड़ लीटर पानी छोड़ा जा रहा है। इस व्यवस्था से अब 1000 एकड़ से अधिक कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा।
पहले स्थिति यह थी कि ग्लेशियर का अधिकांश पानी उपयोग में न आने के कारण सिंधु नदी की ओर बह जाता था। लेकिन अब छोटी-छोटी सहायक नालियां तैयार करके पानी के बहाव को मोड़ा गया है। हाल ही में किए गए तकनीकी सुधारों के बाद, नहर में पानी की गति और मात्रा में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिससे नहर में पानी का बहाव अब 2123 लीटर प्रति सेकेंड तक पहुंच गया है।
पानी की इस नई सुविधा से किसानों को अब अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पहले जल संकट के कारण किसानों को एक निश्चित समय सीमा में पानी मिलता था, जिससे फसल की सिंचाई प्रभावित होती थी। अब पानी की प्रचुर उपलब्धता से उन खेतों में भी खेती करना संभव हो गया है जो सिंचाई के अभाव में सालों से बंजर पड़े थे।
लद्दाख प्रशासन इस मॉडल को बेहद सफल मान रहा है और अब इसे अन्य पहाड़ी इलाकों में भी लागू करने की तैयारी की जा रही है। उपराज्यपाल ने इस परियोजना की सराहना करते हुए कहा कि ग्लेशियर के पिघलते पानी का सही प्रबंधन न केवल किसानों की आय बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य के लिए जल संरक्षण की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम साबित होगा।
Author: Shivam Verma
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