Punjab News: पंजाब के जालंधर में इन दिनों प्रशासनिक स्तर पर मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण का कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन यह प्रक्रिया एक बड़े विवाद के घेरे में आ गई है। बेलारूस में भारत के राजदूत रह चुके 75 वर्षीय पूर्व राजनयिक रमेश चंदर को जिला प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किया गया है। उन्हें अपनी पात्रता और नागरिकता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने का आदेश मिला है, जिसने एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रमेश चंदर ने अपने करियर के दौरान जापान, ब्रिटेन और चेक गणराज्य जैसे महत्वपूर्ण देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। इतने उच्च पदों पर सेवा दे चुके एक व्यक्ति के लिए यह स्थिति काफी चौंकाने वाली है। चंदर का कहना है कि वे पहले ही अपने आधार कार्ड और वोटर आईडी जैसे जरूरी दस्तावेज स्थानीय बूथ स्तरीय अधिकारी को सौंप चुके हैं। बावजूद इसके, उनसे बार-बार प्रमाण मांगे जा रहे हैं, जबकि वे पिछले कई वर्षों से जालंधर में लगातार हर चुनाव में मतदान करते आए हैं।
पूर्व राजनयिक के अनुसार, पुनरीक्षण के दौरान वर्ष 2003 की मतदाता सूची को आधार बनाया जा रहा है। उस समय वे विदेश में भारत की राजनयिक जिम्मेदारियां निभा रहे थे, जिसके कारण उनका नाम उस समय की स्थानीय सूची में होना संभव नहीं था। अब इसी पुराने रिकॉर्ड के साथ मिलान न होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका तर्क है कि यदि एक पूर्व राजदूत को नागरिकता साबित करने में इतनी मशक्कत करनी पड़ रही है, तो आम आदमी की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है जब किसी पूर्व राजदूत को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले पूर्व राजदूत नवदीप सूरी को भी अमृतसर में इसी तरह की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा था। उन्होंने भी अपने अनुभव साझा करते हुए प्रशासनिक जटिलताओं पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। जालंधर के उपायुक्त वरजीत वालिया ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे नियमित सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा बताया है, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों और पूर्व राजनयिकों को पेश आ रही मुश्किलें प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं।











