World News: भारत में होने जा रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी यात्रा शुरू कर दी है। उनके नई दिल्ली पहुंचने से ठीक पहले ड्रैगन की तरफ से एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बयान सामने आया है। बीजिंग ने भारत के साथ अपने कूटनीतिक रिश्तों को मजबूत करने की इच्छा जताई है और दोनों देशों के बीच के तनाव को कम करने पर जोर दिया है।
भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच द्विपक्षीय बातचीत की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि चीन भारत के साथ अपने संबंधों को दीर्घावधि के दृष्टिकोण से देखता है और भविष्य में सहयोग के नए रास्ते तलाशने के लिए पूरी तरह तैयार है। चीनी अधिकारियों का मानना है कि भारत और दक्षिण एशिया के विकास में दोनों देशों का सहयोगात्मक रवैया बेहद अहम है।
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने भी इस बात को दोहराते हुए कहा कि दोनों पड़ोसी देशों को आपसी मतभेदों को सही तरीके से संभालना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वैचारिक या सीमा संबंधी असहमतियों के बावजूद संवाद का सिलसिला नहीं रुकना चाहिए। बीजिंग का यह नरम रुख ऐसे समय में सामने आया है जब पूरी दुनिया की निगाहें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की होने वाली आमने-सामने की बैठक पर टिकी हैं।
करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद चीनी राष्ट्रपति का यह भारत दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है। आखिरी बार शी जिनपिंग साल 2019 में अनौपचारिक बातचीत के लिए तमिलनाडु के महाबलीपुरम आए थे। जानकारों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक राजनीतिक हालात में भारत और चीन के बीच की यह उच्च स्तरीय मुलाकात एशियाई कूटनीति की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
राजधानी दिल्ली में आयोजित हो रहे इस प्रतिष्ठित ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षता भारत कर रहा है, जिसमें ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने पर खास फोकस है। चीन के इन ताजा बयानों से साफ जाहिर होता है कि वह भारत के साथ कूटनीतिक मंच पर एक नए अध्याय की शुरुआत करना चाहता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग की द्विपक्षीय वार्ता के दौरान द्विपक्षीय मुद्दों और सीमा विवादों पर क्या ठोस फैसले लिए जाते हैं।
Author: Shivam Verma
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