UP News: संगमनगरी प्रयागराज इन दिनों भारी बारिश के कारण गंभीर जलभराव की चपेट में है। शहर के प्रमुख इलाकों में स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि मुख्य सड़कों से लेकर रिहायशी कॉलोनियों तक पानी का कब्जा हो गया है। जॉर्जटाउन, करेली, राजरूपपुर और आनंदपुरम जैसे इलाकों में लोग अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं, जहां पांच फीट तक पानी जमा हो जाने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
बारिश का कहर केवल सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर सरकारी व्यवस्थाओं पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अस्पताल, स्कूल, सरकारी दफ्तर, पुलिस थाने और यहां तक कि कोर्ट-कचहरी परिसर में भी पानी भर गया है। इससे मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें बंद कर दिया गया है। बिजली लाइनों में करंट उतरने के डर से कई मोहल्लों की आपूर्ति भी काट दी गई है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि विकास के दावों के बीच जल निकासी की खराब व्यवस्था ने उनकी गृहस्थी को उजाड़ दिया है। कई घरों में सीवर और नालियों का गंदा पानी घुसने से लोग दहशत में हैं। लोगों के घरों में रखा अनाज, कपड़े और बच्चों की किताबें पूरी तरह भीगकर खराब हो चुकी हैं। सड़कों पर ऑटो और ई-रिक्शा का संचालन पूरी तरह ठप है, जिससे सामान्य कामकाज के लिए लोगों को नाव या कमर तक गहरे पानी में पैदल चलना पड़ रहा है।
इधर, गंगा और यमुना नदियों का बढ़ता जलस्तर भी प्रशासन की चिंताएं बढ़ा रहा है। नैनी, फाफामऊ और छतनाग में नदियों का पानी खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है, जिससे तटीय इलाकों में रहने वाले परिवारों में बाढ़ का डर सताने लगा है। घाटों के डूबने के बाद अब पानी रिहायशी इलाकों की तरफ तेजी से बढ़ रहा है, जिससे बचाव कार्यों के लिए टीम को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
प्रयागराज की इस दुर्दशा पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर करोड़ों के विकास कार्यों के बावजूद शहर की ड्रेनेज व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों साबित हुई? पर्यटन नगरी के रूप में पहचान रखने वाला प्रयागराज इस समय बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। प्रशासन ने जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने के लिए मशीनों को तैनात किया है, लेकिन रुक-रुक कर हो रही बारिश राहत कार्यों में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
Author: Shivam Verma
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