World News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ने पश्चिम एशिया की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवादित मुद्दों पर ठोस और संतोषजनक प्रगति दिखाता है, तो उनका प्रशासन ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने के लिए पूरी तरह तैयार है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे इस कूटनीतिक ड्रामे पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं क्योंकि इसका असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर उच्च स्तरीय बातचीत होने की संभावना है। अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय ने इस दिशा में अपने वरिष्ठ अधिकारियों और दूतों को सक्रिय कर दिया है। बातचीत की इस प्रक्रिया में अमेरिका की तरफ से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो अहम भूमिका निभाते नजर आएंगे। हालांकि अमेरिकी पक्ष ने उन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें दावा किया जा रहा था कि वॉशिंगटन ने तेहरान के सामने पहले ही कोई रियायती प्रस्ताव रख दिया है।
दूसरी तरफ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने राष्ट्रपति ट्रंप के फैसलों का बचाव करते हुए एक कड़ा बयान दिया है। रुबियो का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के सैन्य रूप से अत्यधिक शक्तिशाली बनने से पहले ही निर्णायक कदम उठाकर दुनिया को एक बड़ी तबाही से बचा लिया है। उनका दावा था कि ईरान चुपचाप अपने हथियारों के जखीरे को मजबूत कर रहा था ताकि भविष्य में किसी भी हमले की स्थिति में अपने गुप्त परमाणु संयंत्रों को सुरक्षित रख सके, लेकिन समय रहते उठाए गए कदमों ने इस बड़े खतरे को टाल दिया है।
मध्यस्थों के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे कूटनीतिक चैनल अब भी खुले हुए हैं। तेहरान ने भी परमाणु मामलों पर कुछ नरमी दिखाने के संकेत दिए हैं, लेकिन समय सीमा और नियमों के पालन को लेकर दोनों देशों के बीच पेच फंसा हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस सप्ताह होने वाली आगामी बैठकों में कोई सकारात्मक सहमति बनती है, तो पश्चिम एशिया के सुलगते हालात में कुछ ठंडक जरूर देखने को मिल सकती है, अन्यथा संघर्ष का यह दायरा और अधिक गहरा सकता है।











