राजस्थान में आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए सरकार द्वारा संचालित राजस्थान संपर्क पोर्टल (181) की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की कवायद तेज हो गई है। इसी कड़ी में शुक्रवार को जल ग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग की निदेशक एवं पदेन विशिष्ट शासन सचिव कल्पना अग्रवाल ने जयपुर स्थित 181 कॉल सेंटर का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने विभाग से जुड़ी लंबित शिकायतों और जनता की मांगों की गहन समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान कल्पना अग्रवाल ने कॉल सेंटर के माध्यम से सीधे नागरिकों से संवाद स्थापित किया। उन्होंने विभिन्न जिलों से आए परिवादियों से बात कर उनकी समस्याओं के समाधान की वर्तमान स्थिति जानी। निदेशक ने स्पष्ट किया कि पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों को नजरअंदाज न किया जाए और उनका गुणवत्तापूर्ण निपटारा सुनिश्चित करना अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे विभागीय बैठकों में इन शिकायतों का नियमित फॉलो-अप लें।
आंकड़ों पर गौर करें तो जल ग्रहण विकास विभाग से संबंधित अब तक पोर्टल पर 1,643 परिवाद दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 1,372 का संतोषजनक समाधान किया जा चुका है। निदेशक ने उन जिलों के अधिकारियों को विशेष हिदायत दी है जहां शिकायतों के निस्तारण की गति धीमी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि देरी होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सीधे संवाद के दौरान बालोतरा, जालौर, डीडवाना-कुचामन और जैसलमेर जैसे जिलों के कई परिवादियों ने अपनी टांका निर्माण और गुणवत्ता से संबंधित शिकायतों पर की गई कार्रवाई पर संतुष्टि जताई। वहीं, चित्तौड़गढ़ और अलवर जिले के निवासियों ने भी पोर्टल के माध्यम से अपनी समस्याओं के समाधान के बाद संतोष व्यक्त किया। निदेशक ने कोटपूतली-बहरोड़ के एक परिवादी को उनके एनिकट निर्माण की मांग पर उचित कार्यवाही का भरोसा दिलाया है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारी बारी-बारी से राजस्थान संपर्क पोर्टल पर स्वयं उपस्थित होकर शिकायतों की निगरानी कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य यह है कि आम नागरिक घर बैठे ही अपनी समस्या प्रशासन तक पहुँचा सकें और उन्हें समयबद्ध तरीके से राहत मिल सके। यह निरीक्षण प्रक्रिया राज्य सरकार की पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन देने की नीति का ही हिस्सा है।











