Parliament Mansoon Session: संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में आज युवाओं के भविष्य से जुड़े सबसे अहम मुद्दे यानी एंटी पेपर लीक बिल पर गहन चर्चा शुरू हो गई है। पहले इस महत्वपूर्ण बिल के लिए छह घंटे का समय निर्धारित किया गया था, लेकिन विपक्षी दलों की ओर से समय बढ़ाने की मांग के बाद सरकार ने बड़ा लचीलापन दिखाया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में घोषणा की कि सरकार इस गंभीर विषय पर 10 घंटे तक की विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने चर्चा का समय बढ़ाकर 10 घंटे कर दिया है।
सदन में चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में स्पष्ट किया कि सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नए संशोधन में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए पांच महीने के भीतर फैसला सुनाने का प्रावधान किया गया है, जिससे परीक्षा माफियाओं पर नकेल कसी जा सकेगी। उन्होंने पुराने समय के पेपर लीक मामलों का हवाला देते हुए कहा कि पहले भी ऐसी घटनाएं होती रही हैं, लेकिन अब सरकार फुलप्रूफ सिस्टम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
विपक्ष ने सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि पेपर लीक का मुद्दा देश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक विफल रही हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि सरकार को इमरजेंसी की याद आ रही है, तो उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि उस समय भी बड़े परिवर्तन हुए थे और इस बार भी युवा पीढ़ी बड़ा बदलाव लाएगी।
दूसरी ओर, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार के पास यूपीआई ट्रांजेक्शन का तो हर मिनट का डेटा है, लेकिन पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का कोई ठोस आंकड़ा नहीं है। उन्होंने पूछा कि आखिर पेपर लीक अब एक पैटर्न क्यों बनता जा रहा है? वहीं, भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि यह विधेयक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की युवाओं के प्रति संवेदनशीलता का प्रमाण है और विपक्ष को राजनीति से ऊपर उठकर इस बिल का समर्थन करना चाहिए।
संसद परिसर में भी आज काफी गहमागहमी रही। पप्पू यादव सिर पर पट्टी और हाथ में लाठी लेकर संसद पहुंचे, जो विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए बल प्रयोग का उनका तरीका था। सदन के भीतर गौरव गोगोई सहित कई विपक्षी नेताओं ने पेपर लीक के मामलों में आरोपियों को बेल मिलने पर सवाल उठाए और इसे सरकार की विफलता का स्मारक करार दिया। फिलहाल लोकसभा में चर्चा जारी है और देश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह नया कानून वाकई भविष्य में छात्रों को नकल माफियाओं से सुरक्षा दे पाएगा।
Author: Shivam Verma
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