Punjab News: कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद मनीष तिवारी ने हाल ही में संसद के मानसून सत्र के दौरान एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दे को उठाया है। उन्होंने लोकसभा में एक स्थगन प्रस्ताव का नोटिस पेश करते हुए छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के कथित इस्तेमाल पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका तर्क है कि परीक्षा में पेपर लीक होने के विरोध में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे छात्रों पर अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।
अपने आधिकारिक नोटिस में तिवारी ने बताया कि 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया था। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में 80 से अधिक छात्र बुरी तरह घायल हो गए थे। सांसद ने सदन की कार्यवाही को स्थगित करने की मांग की है ताकि इस गंभीर विषय पर तत्काल चर्चा की जा सके और जवाबदेही तय की जा सके।
कांग्रेस नेता ने इस मामले को राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा करार देते हुए कहा कि निहत्थे छात्रों पर बल प्रयोग करना उनके संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इस तरह की हिंसक कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह संसद के निर्धारित कामकाज को रोककर इस घटना पर व्यापक बहस की अनुमति दे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
इस बीच, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। मिली जानकारी के अनुसार, सीआरपीएफ (CRPF) द्वारा प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों की एक आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, जांच दल द्वारा अगले हफ्ते तक अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश किए जाने की उम्मीद है, जिसके बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई स्पष्ट हो पाएगी।
फिलहाल विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। मनीष तिवारी की इस मांग ने संसद में एक नई बहस छेड़ दी है, जिससे सरकार की नीतियों और सुरक्षा बलों द्वारा किए जाने वाले बल प्रयोग के मानकों पर सवाल उठने लगे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस स्थगन प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाती है और घायलों को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।











