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World News: संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद के खिलाफ भारत की बड़ी मुहिम, व्यापक कन्वेंशन को जल्द अपनाने का फिर उठा मुद्दा

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World News: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए भारत द्वारा प्रस्तावित व्यापक अभिसमय यानी कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म (CCIT) को अपनाने पर जोर दिया है। संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति की नौवीं समीक्षा के दौरान सदस्य देशों से इस प्रस्ताव को जल्द से जल्द लागू करने का आग्रह किया गया है। यह प्रस्ताव पिछले 31 वर्षों से लंबित है, जिसे अब वैश्विक सुरक्षा के लिए अनिवार्य माना जा रहा है।

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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने इस महत्वपूर्ण बैठक में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब तक दुनिया में आतंकवाद से लड़ने के लिए एक साझा कानूनी ढांचा नहीं होगा, तब तक इस वैश्विक बुराई पर काबू पाना असंभव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को कभी भी न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने सदस्य देशों को याद दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे मानदंड या ‘अच्छे-बुरे’ आतंकवादियों का भेदभाव सुरक्षा की स्थिति को और बिगाड़ता है।

भारत ने इस बात पर चिंता जताई है कि कुछ देश अपने राजनीतिक उद्देश्यों के कारण आतंकवादियों को शरण देते हैं या उन्हें ‘स्वतंत्रता सेनानी’ बताकर समर्थन करते हैं। पी. हरीश ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के वित्तपोषकों, आयोजकों और प्रायोजकों को न्याय के कटघरे में लाना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। सीसीआईटी के जरिए दुनिया भर में आतंकियों की पनाहगाहों को नष्ट करना और उनके हथियारों व पैसों के तंत्र को ध्वस्त करना बेहद आसान हो जाएगा।

हालिया समीक्षा बैठक में 140 देशों ने इस रणनीति का समर्थन किया, हालांकि अमेरिका समेत कुछ देशों ने इसे और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता जताई। भारत का मानना है कि अब समय आ गया है कि तमाम वैश्विक मतभेदों को भुलाकर दुनिया इस कानून पर सर्वसम्मति बनाए। भारत की यह निरंतर कोशिश है कि आतंकवाद के खिलाफ एक ऐसी वैश्विक कानूनी लक्ष्मण रेखा खींची जाए, जिसका उल्लंघन करने वाला कोई भी देश बच न सके।

अंत में, भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भेदभावपूर्ण दृष्टिकोण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और पूर्वाग्रह के मामलों में सार्वभौमिक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। केवल कुछ विशेष धर्मों या समुदायों के प्रति पूर्वाग्रह की चिंता करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ एक ठोस, निष्पक्ष और वैश्विक कानूनी ढांचे को अपनाने के लिए अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखानी होगी ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य दिया जा सके।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

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