Home » उत्तर प्रदेश » मुरादाबाद » Moradabad News: राजनीति में रुचि वीरा का दबदबा- सपा के दिग्गज मुस्लिम नेताओं का पत्ता क्यों कट रहा?

Moradabad News: राजनीति में रुचि वीरा का दबदबा- सपा के दिग्गज मुस्लिम नेताओं का पत्ता क्यों कट रहा?

Facebook
X
WhatsApp

Moradabad News:  उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुरादाबाद का सियासी पारा इन दिनों चरम पर है। समाजवादी पार्टी के भीतर चल रही शह-मात की इस लड़ाई ने कई दिग्गजों का भविष्य दांव पर लगा दिया है। मुरादाबाद, जो कि मुस्लिम बहुल इलाका माना जाता है, वहां रुचि वीरा का बढ़ता प्रभाव चर्चा का विषय बना हुआ है। रुचि वीरा ने बेहद चतुराई से एक-एक कर पार्टी के बड़े चेहरों को हाशिए पर धकेल दिया है, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि जिले की सियासी कमान अब पूरी तरह बदलने की दिशा में है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

रुचि वीरा के सफर की शुरुआत तब हुई जब उन्होंने मुरादाबाद को अपनी मुख्य सियासी कर्मभूमि चुना। यहाँ के समीकरणों को समझते हुए उन्होंने सबसे पहले तत्कालीन सांसद डॉ. एसटी हसन के राजनीतिक करियर पर विराम लगाया। अखिलेश यादव द्वारा टिकट कन्फर्म होने के बावजूद, रुचि वीरा ने अपनी दावेदारी मजबूती से पेश की और अंततः एसटी हसन को अपना नामांकन तक वापस लेना पड़ा। इस घटना ने साबित कर दिया कि रुचि वीरा पार्टी आलाकमान में अपनी पैठ बनाने में कितनी सक्षम हैं।

ताजा घटनाक्रम में कांठ विधानसभा सीट से विधायक और सपा के कद्दावर नेता कमाल अख्तर का नाम भी इसी सूची में जुड़ गया है। कमाल अख्तर, जो विधानसभा में मुख्य सचेतक के पद पर थे, उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। इन दोनों नेताओं के बीच जारी तल्खी और विवाद को शांत करने के लिए पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में बैठक भी बुलाई थी, लेकिन नतीजा रुचि वीरा के पक्ष में ही निकला और कमाल अख्तर को अपना पद खोना पड़ा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रुचि वीरा की नजरें अब 2027 के विधानसभा चुनावों पर टिकी हैं। चर्चाएं हैं कि वह मुरादाबाद शहर सीट से अपनी बेटी स्वाति वीरा के लिए टिकट की दावेदारी कर सकती हैं। यदि ऐसा होता है, तो मुरादाबाद के स्थानीय मुस्लिम नेताओं के लिए यह एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। शहर की सीट पर मुस्लिम और वैश्य समीकरणों को साधने की कोशिश में रुचि वीरा की यह नई चाल मुरादाबाद की राजनीति में एक और बड़ा उलटफेर ला सकती है।

फिलहाल मुरादाबाद की सियासत में वर्चस्व की जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। एक तरफ कमाल अख्तर जैसे पुराने दिग्गज हैं, तो दूसरी तरफ रुचि वीरा का बढ़ता सियासी कद है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सपा मुखिया अखिलेश यादव आने वाले समय में इन दोनों गुटों के बीच कैसे संतुलन बिठाते हैं और क्या मुरादाबाद में रुचि वीरा का विजय रथ इसी तरह आगे बढ़ता रहेगा या पार्टी के भीतर कोई नया समीकरण जन्म लेगा।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

Description

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ताजा खबरें