World News: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने देश की आंतरिक नीतियों में एक बड़ा बदलाव करते हुए ‘एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस प्रमोशन लॉ’ को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य चीन में रहने वाले विभिन्न जातीय समूहों के बीच एकता को बढ़ावा देना और उन्हें मुख्यधारा की हान चीनी संस्कृति के साथ जोड़ना बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम शी जिनपिंग की उस दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है, जिसके जरिए वे चीन को एक वैचारिक रूप से एकीकृत राष्ट्र बनाना चाहते हैं।
इस नए कानून को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चाएं हो रही हैं। सरकार का दावा है कि यह कानून देश में स्थिरता बनाए रखने और सभी जातीय समुदायों के विकास में समानता लाने के लिए जरूरी है। हालांकि, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने इस पर चिंता जाहिर की है। उनका तर्क है कि इस तरह के कानूनों का उपयोग अक्सर अल्पसंख्यक समुदायों की अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को दबाने के लिए किया जाता है।
कानून के मुख्य प्रावधानों के अनुसार, चीन के सभी प्रांतों में जातीय एकता को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे। इसके तहत शिक्षा, सामाजिक गतिविधियों और सार्वजनिक जीवन में सरकारी एजेंडे को प्राथमिकता दी जाएगी। शी जिनपिंग की सरकार का स्पष्ट संदेश है कि देश की अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक मजबूत और एकीकृत राष्ट्रीय पहचान अनिवार्य है, जिसमें किसी भी प्रकार के अलगाववादी विचारों के लिए कोई स्थान नहीं होगा।
आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो चीन का लक्ष्य इन कानूनों के जरिए दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को आर्थिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। सरकार का मानना है कि जब सभी समुदाय एक साझा सांस्कृतिक धागे में बंधे होंगे, तो देश की आर्थिक वृद्धि की गति और भी तेज होगी। वहीं, आलोचकों का कहना है कि आर्थिक विकास की आड़ में यह अनिवार्य सांस्कृतिक एकीकरण का एक तरीका है, जो दीर्घकाल में सामाजिक तनाव पैदा कर सकता है।
फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चीन इस नए कानून को जमीन पर किस तरह लागू करता है और इसके परिणाम क्या होंगे। शी जिनपिंग की यह महत्वाकांक्षी परियोजना चीन के भीतर के सामाजिक ताने-बाने को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखती है। आने वाले समय में यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह कानून चीन को मजबूती देता है या फिर आंतरिक असंतोष को और अधिक हवा देता है।
Author: Shivam Verma
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