संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर हाल ही में रूस और जर्मनी के बीच तीखी तकरार देखने को मिली है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जर्मनी के विदेश मंत्री ने रूस को चेतावनी देते हुए यूक्रेन संघर्ष को रोकने और तनाव कम करने की अपील की थी। लेकिन रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इस सलाह को सिरे से खारिज कर दिया और जर्मनी के आक्रामक तेवर पर ही कड़े सवाल खड़े कर दिए।
जर्मनी के प्रतिनिधि ने यूरोपीय देशों और नाटो के खिलाफ बढ़ रहे खतरों का हवाला देते हुए रूस से अपनी नीतियां बदलने को कहा था। इसके जवाब में सर्गेई लावरोव ने बहुत ही कड़े शब्दों में बर्लिन के रुख की आलोचना की। उन्होंने सीधे तौर पर जर्मनी को याद दिलाया कि क्या उन्हें इतिहास और विशेष रूप से दूसरे विश्व युद्ध के सबक याद नहीं हैं, क्योंकि उनका मौजूदा सैन्य रवैया यूरोप के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
दोनों देशों के बीच यह उच्चस्तरीय संवाद ऐसे समय पर हुआ है जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध लगातार भयानक रूप लेता जा रहा है। साल 2022 के बाद से यह पहला मौका था जब दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की आमने-सामने सीधी बैठक हुई, लेकिन यह बेनतीजा साबित हुई। लावरोव ने साफ कहा कि जर्मन मंत्री ने केवल अपनी पुरानी घिसी-पिथी आलोचनात्मक बातें ही दोहराई हैं, जिससे शांति की कोई नई उम्मीद नहीं जगती।
इस टकराव के दौरान रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जर्मनी और जापान को स्थायी सदस्यता दिए जाने के प्रस्ताव का भी खुलकर विरोध किया। लावरोव ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि इन देशों को वीटो पावर देने की कोई भी कोशिश की गई, तो रूस उसका कड़ा विरोध और वीटो का इस्तेमाल करेगा। रूस का मानना है कि इन देशों का पिछला इतिहास और वर्तमान सैन्य नीतियां वैश्विक शांति के अनुकूल नहीं हैं।
इसके अलावा, रूसी विदेश मंत्री ने अमेरिका और पश्चिमी देशों पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी देश रूस को रणनीतिक रूप से हराने की असफल साजिश रच रहे हैं, जिससे पूरी दुनिया एक गंभीर गतिरोध की ओर बढ़ रही है। इस गर्मागर्म बहस ने साफ कर दिया है कि रूस और पश्चिमी देशों के बीच का यह कूटनीतिक तनाव आने वाले दिनों में और अधिक गहरा सकता है।










