Shivpal Singh: भारतीय एथलेटिक्स जगत से एक बेहद निराशाजनक खबर सामने आ रही है। टोक्यो ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले स्टार जेवलिन थ्रोअर शिवपाल सिंह पर नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी यानी NADA ने सख्त कार्रवाई की है। डोपिंग रोधी नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में शिवपाल पर पूरे 10 साल का लंबा प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिससे उनके खेल करियर पर अब लगभग पूर्णविराम लगता दिख रहा है।
नाडा के एंटी-डोपिंग डिसिप्लिनरी पैनल की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, शिवपाल सिंह का हालिया डोप टेस्ट पॉजिटिव आया था। एथलीट के सैंपल में मेथेंडिएनोन नामक प्रतिबंधित एनाबॉलिक स्टेरॉयड पाया गया है। यह पदार्थ वाडा (WADA) और नाडा की प्रतिबंधित सूची में शामिल है, जिसके सेवन को खेल जगत में नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।
यह पहला मौका नहीं है जब शिवपाल सिंह डोपिंग विवाद में फंसे हैं। इससे पहले साल 2021 में भी उनके सैंपल में स्टेरॉयड मिले थे, जिसके बाद उन्हें 4 साल के बैन का सामना करना पड़ा था। हालांकि, उस समय सप्लीमेंट के दूषित होने की दलील के बाद सजा को घटाकर एक साल कर दिया गया था। लेकिन इस बार दूसरी बार नियमों के उल्लंघन के चलते बोर्ड ने उन पर कोई रहम नहीं दिखाई और 10 साल की कड़ी सजा सुनाई है।
शिवपाल सिंह को साल 2019 की एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने के लिए जाना जाता है, जहां उन्होंने 86.23 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया था। वे लंबे समय से भारतीय एथलेटिक्स का एक जाना-माना नाम रहे हैं। लेकिन अब 31 साल की उम्र में लगे इस बड़े बैन के बाद उनकी वापसी की राह बेहद कठिन और नामुमकिन सी नजर आ रही है।
बता दें कि पिछले कुछ समय से भारतीय एथलीटों का डोपिंग में फंसना खेल जगत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। शिवपाल जैसे अनुभवी खिलाड़ी का इस तरह से डोपिंग मामले में दोषी पाया जाना न केवल उनके करियर के लिए बल्कि देश के लिए भी एक बड़ा नुकसान है। अब यह देखना होगा कि क्या एथलीट इस निर्णय के खिलाफ अपील करता है या फिर उनका अंतरराष्ट्रीय करियर यहीं समाप्त हो जाता है।











