अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनावों के परिणाम आने शुरू हो गए हैं, जिसमें भारतीय मूल की नेता पिया दांडिया ने फ्लोरिडा के चुनावी मैदान में बाजी मार ली है। उन्होंने फ्लोरिडा की 22वीं कांग्रेसनल सीट से शानदार जीत हासिल करते हुए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपनी पक्की जगह बना ली है। प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों और चुनावी डेस्क की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस रोमांचक मुकाबले में पिया दांडिया ने अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी केसी असकर को करारी शिकस्त दी है।
इस कड़े मुकाबले में पूर्व स्कूल प्रिंसिपल रहीं पिया दांडिया को लगभग 51.9 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके विरोधी उम्मीदवार को 48.1 प्रतिशत वोटों से संतोष करना पड़ा। दक्षिण फ्लोरिडा के इस नए और बेहद महत्वपूर्ण कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में उनकी यह जीत भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने मुख्य रूप से महंगाई को नियंत्रित करने और आम नागरिकों के लिए अमेरिकन ड्रीम के रास्ते आसान बनाने जैसे मुद्दों पर जोर दिया था, जिन्हें मतदाताओं ने काफी सराहा।
दूसरी ओर, अमेरिकी संसद के उच्च सदन यानी सीनेट में भी डेमोक्रेटिक पार्टी को बड़ी सफलता हाथ लगी है। शुरुआती और अहम परिणामों के अनुसार, डेमोक्रेट्स ने नॉर्थ कैरोलिना की सीनेट सीट अपने नाम कर ली है। पूर्व गवर्नर रॉय कूपर ने रिपब्लिकन उम्मीदवार को शिकस्त देकर यह सीट हासिल की है। इस जीत को डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए एक मजबूत संकेत माना जा रहा है, क्योंकि देश के कई हिस्सों में कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है।
इसके अलावा, वर्जीनिया और मैरीलैंड जैसे राज्यों में भी भारतीय-अमेरिकी नेताओं का दबदबा कायम रहा है। वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से सुहास सुब्रमण्यम ने एक बार फिर शानदार जीत दर्ज करते हुए अपना दो साल का कार्यकाल पक्का कर लिया है। वहीं, मैरीलैंड में अरुणा मिलर ने भी अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ का अहसास कराते हुए एक और कार्यकाल अपने नाम किया है, जिससे देश के शीर्ष पदों पर भारतीय मूल के लोगों का प्रतिनिधित्व लगातार मजबूत हो रहा है।
हालांकि कुछ सीटों पर अभी भी मतगणना जारी है और तस्वीर पूरी तरह साफ होना बाकी है, लेकिन इन शुरुआती परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिकी राजनीति में भारतीय-मूल के नेताओं का कद तेजी से बढ़ रहा है। ओहियो और जॉर्जिया जैसी अन्य महत्वपूर्ण सीटों पर भी राजनीतिक सरगर्मी तेज बनी हुई है, जहां दोनों ही प्रमुख दल अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। आने वाले घंटों में इन चुनावों के फाइनल आंकड़े देश की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।










