West Bengal: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा सत्ता संघर्ष अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हाथों विधानसभा चुनाव में हार और सत्ता गंवाने के बाद पार्टी प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ी थीं, लेकिन अब बागी खेमे के भीतर ही मतभेद सामने आने लगे हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले बागी विधायकों के गुट में नेतृत्व को लेकर असहमति दिखाई देने लगी है।
हाल ही में 58 बागी विधायकों ने अलग खेमे का गठन कर पार्टी नेतृत्व को चुनौती दी थी, लेकिन महज 24 घंटे के भीतर ही कई विधायक इस गुट की रणनीति और ममता बनर्जी की भूमिका को लेकर असंतोष जताने लगे हैं। कई बागी विधायकों ने स्पष्ट किया है कि उनके लिए ममता बनर्जी ही सर्वोच्च नेता हैं और यदि उन्हें केवल सलाहकार की भूमिका तक सीमित करने की कोशिश की गई तो वे अपने भविष्य पर पुनर्विचार कर सकते हैं।
ममता को मुख्य सलाहकार बनाने के प्रस्ताव पर विवाद
विवाद की शुरुआत बागी विधायक दल के नेता ऋतब्रत बनर्जी के एक प्रस्ताव से हुई। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुके ऋतब्रत बनर्जी ने गुरुवार को आयोजित बैठक में सुझाव दिया कि ममता बनर्जी टीएमसी विधायक दल की मुख्य सलाहकार के रूप में कार्य कर सकती हैं।
हालांकि, यह प्रस्ताव कई बागी विधायकों को स्वीकार नहीं हुआ। उनका कहना है कि ममता बनर्जी का राजनीतिक कद और पार्टी निर्माण में उनका योगदान इतना बड़ा है कि उन्हें केवल सलाहकार की भूमिका में सीमित नहीं किया जा सकता।
पांचला विधानसभा क्षेत्र से बागी विधायक गुलशन मल्लिक ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें बताया गया था कि पार्टी ममता बनर्जी के नेतृत्व में ही आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि ममता केवल सलाहकार नहीं हैं और यदि उन्हें सर्वोच्च नेता के रूप में स्वीकार नहीं किया गया तो उन्हें बागी गुट में बने रहने को लेकर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा।
बागी खेमे में नेतृत्व को लेकर दो राय
गुलशन मल्लिक के बयान ने यह संकेत दे दिया है कि बागी गुट के भीतर नेतृत्व को लेकर एकमत नहीं है। कई विधायक चाहते हैं कि ममता बनर्जी पार्टी की सर्वोच्च नेता बनी रहें, जबकि कुछ नेता संगठनात्मक ढांचे में नई व्यवस्था की वकालत कर रहे हैं।
सिताई विधानसभा क्षेत्र की बागी विधायक संगीता रॉय बसुनिया ने भी ममता बनर्जी के समर्थन में खुलकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी उनकी सर्वोच्च नेता हैं और हमेशा रहेंगी। उनके अनुसार, ममता को केवल सलाहकार नहीं माना जा सकता, क्योंकि पार्टी के कार्यकर्ता और विधायक उनके नेतृत्व में ही काम करना चाहते हैं।
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ है असंतोष, ममता के खिलाफ नहीं
बागी विधायकों का रुख शुरुआत से ही स्पष्ट रहा है कि उनका विरोध ममता बनर्जी के नेतृत्व से नहीं, बल्कि विधायक दल के कामकाज में अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव और अधिकार से है। यही वजह है कि बागी नेता लगातार ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बीच राजनीतिक अंतर दिखाने का प्रयास कर रहे हैं।
बागियों का कहना है कि वे ममता बनर्जी के प्रति वफादार हैं, लेकिन पार्टी के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया में अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर उनकी आपत्तियां हैं। इसी रणनीति के जरिए वे कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी लड़ाई पार्टी संस्थापक के खिलाफ नहीं, बल्कि नेतृत्व के एक विशेष तरीके के खिलाफ है।
58 विधायकों ने स्थापित किया था नियंत्रण
गौरतलब है कि गुरुवार को 58 विधायकों ने टीएमसी विधायक दल पर अपना नियंत्रण स्थापित करने का दावा किया था। इसी दौरान पार्टी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष चुना गया और विधानसभा अध्यक्ष से उन्हें मान्यता भी मिल गई।
इस घटनाक्रम ने तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक नेतृत्व और उसके निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच मौजूद गहरे मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया। अब बागी गुट के भीतर उभर रहे नए मतभेदों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक और दिलचस्प मोड़ ला दिया है।
Author: Shivam Verma
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