Karnataka News: कर्नाटक में नई सरकार के गठन के कुछ ही दिनों बाद कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री बनाए गए वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी ने मनचाहा विभाग नहीं मिलने पर मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले से राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के दो दिन के भीतर ही यह बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। रेड्डी की नाराजगी का मुख्य कारण उन्हें बेंगलुरु विकास मंत्रालय का प्रभार नहीं मिलना बताया जा रहा है।
इस्तीफे के बाद कांग्रेस के प्रति जताई निष्ठा
मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद रामलिंगा रेड्डी ने स्पष्ट किया कि उनका फैसला केवल मंत्री पद से संबंधित है और वह कांग्रेस पार्टी के साथ बने हुए हैं।
उन्होंने कहा, “मैं अभी भी कांग्रेस पार्टी में हूं। मैंने पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है। मैं पिछले 53 सालों से कांग्रेस पार्टी में हूं। मैंने पार्टी में कई जिम्मेदारियां निभाई हैं। मैंने पूर्व मुख्यमंत्री एम. वीरप्पा मोइली और एस.एम. कृष्णा समेत कई मुख्यमंत्रियों की कैबिनेट में मंत्री के तौर पर काम किया है। मैंने कभी किसी से मंत्री पद नहीं मांगा।”
3 जून को बने थे डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री
गौरतलब है कि 3 जून 2026 को डीके शिवकुमार ने कर्नाटक के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी। यह बदलाव सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद हुआ था। शपथ ग्रहण समारोह के बाद मंत्रिमंडल का गठन किया गया और विभिन्न मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा किया गया।
हालांकि, विभागों के आवंटन के दौरान रामलिंगा रेड्डी को वह मंत्रालय नहीं मिला जिसकी उन्हें उम्मीद थी। इसके बाद उनकी नाराजगी खुलकर सामने आ गई।
बेंगलुरु विकास मंत्रालय को लेकर था विवाद
आठ बार विधायक रह चुके रामलिंगा रेड्डी लंबे समय से बेंगलुरु विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी चाहते थे। बताया जाता है कि उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह बेंगलुरु विकास मंत्रालय के अलावा कोई अन्य विभाग स्वीकार नहीं करेंगे।
इसके बावजूद सरकार ने उन्हें वृहद और मध्यम सिंचाई विभाग सौंपा। इसी फैसले को लेकर उन्होंने असंतोष जताया और अंततः मंत्री पद छोड़ने का निर्णय लिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया इस्तीफे का ऐलान
पोर्टफोलियो आवंटन को लेकर बढ़ते विवाद के बीच रामलिंगा रेड्डी ने शुक्रवार सुबह एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। इसी दौरान उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा की।
सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को विभागों के बंटवारे को लेकर हुई बैठक के दौरान भी वह नाराज नजर आए थे और बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए थे। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार रात अपने 13 मंत्रियों के बीच विभागों का वितरण किया था।
पुराने वादे का भी उठाया मुद्दा
बताया जा रहा है कि विभागों के बंटवारे को लेकर हुई बैठक में रामलिंगा रेड्डी ने मुख्यमंत्री को वर्ष 2023 में किए गए उस वादे की याद दिलाई थी, जिसमें कहा गया था कि भविष्य में कैबिनेट फेरबदल होने पर उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग दिया जाएगा।
रेड्डी जैसे वरिष्ठ नेता की नाराजगी ने सरकार और पार्टी संगठन दोनों के भीतर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस मुद्दे को लेकर सरकार के अंदर लगातार बैठकों और चर्चाओं का दौर जारी है।
मुख्यमंत्री ने अपने पास रखे वित्त और कार्मिक विभाग
राज्यपाल थावरचंद गहलोत द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने वित्त, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग अपने पास रखे हैं। इसके अलावा सभी गैर-आवंटित विभागों का प्रभार भी उनके पास रहेगा।
उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर को राजस्व विभाग के साथ युवा सशक्तीकरण एवं खेल विभाग सौंपा गया है। वहीं प्रियंक खरगे को गृह विभाग के साथ सूचना प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
वरिष्ठ मंत्रियों को मिले प्रमुख विभाग
सरकार में केजे जॉर्ज को ऊर्जा विभाग और पर्यटन विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। एमबी पाटिल को बड़े एवं मध्यम उद्योग विभाग, सतीश जारकीहोली को लोक निर्माण विभाग, केएच मुनियप्पा को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग तथा शरण प्रकाश पाटिल को चिकित्सा शिक्षा विभाग सौंपा गया है।
अधिसूचना के अनुसार कृष्णा बायरे गौड़ा को वृहत बेंगलुरु प्राधिकरण (जीबीए) के तहत बेंगलुरु शहरी विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
यतींद्र सिद्धरमैया को मिला शहरी विकास विभाग
बैराथी सुरेश को परिवहन विभाग, यू टी खादर को स्वास्थ्य विभाग और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पुत्र यतींद्र सिद्धरमैया को शहरी विकास विभाग सौंपा गया है। वहीं ईश्वर खंड्रे को ग्रामीण विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
यतींद्र सिद्धरमैया के अधीन शहरी जलापूर्ति एवं जल निकासी बोर्ड, शहरी अवसंरचना विकास एवं वित्त निगम, सभी शहरी विकास प्राधिकरण तथा स्थानीय नियोजन प्राधिकरण भी शामिल किए गए हैं।
Author: Shivam Verma
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