UP News: उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता को चुनौती देने वाले एक बड़े गिरोह का नोएडा एसटीएफ ने पर्दाफाश किया है। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि पेपर लीक करने वाले शातिर अपराधियों के तार सीधे परीक्षा केंद्रों के अंदर तक जुड़े हुए थे। गिरोह के सदस्य न केवल पेपर आउट करवाते थे, बल्कि परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था और वहां के तकनीकी तंत्र में भी अपनी गहरी पैठ बना चुके थे।
एसटीएफ की गिरफ्त में आए मुख्य आरोपी लोकेश से पूछताछ में पता चला है कि यह नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। इसका जाल पांच बड़े राज्यों में फैला हुआ है, जिनमें दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र शामिल हैं। आरोपी लोकेश साल 2017 से लगातार परीक्षा केंद्रों को निशाना बना रहा था और विभिन्न राज्यों में सक्रिय नकल माफियाओं को हाईटेक उपकरण सप्लाई कर रहा था।
जांच एजेंसी को आरोपी के पास से 92 मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन बरामद हुई हैं, जिनका उपयोग सर्वर हैकिंग और प्रॉक्सी के जरिए नकल कराने में किया जाता था। एसटीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह कोई छोटी-मोटी धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक ढांचा है। गिरोह के पास परीक्षा केंद्रों के निगरानी सिस्टम और कंप्यूटर लैब की पूरी जानकारी रहती थी, जिससे वे बड़ी आसानी से परीक्षा को प्रभावित कर देते थे।
नोएडा एसटीएफ अब इस पूरे मामले की गहनता से पड़ताल कर रही है। एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि पिछले सात-आठ वर्षों में किन-किन भर्ती परीक्षाओं में इस गिरोह ने सेंधमारी की है। साथ ही, उन परीक्षा केंद्रों के कर्मचारियों और तकनीकी स्टाफ की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जो इस नेटवर्क के साथ मिलकर काम कर रहे थे। संदिग्ध गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले हर व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस हाईटेक नकल गिरोह के खुलासे ने भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसटीएफ का कहना है कि वे इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा सहित अन्य महत्वपूर्ण परीक्षाओं में इन उपकरणों का कितना असर पड़ा है। जांच टीम का मुख्य लक्ष्य इस पूरे सिंडिकेट को जड़ से खत्म करना है ताकि भविष्य में युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो सके।











