राजधानी दिल्ली के संसद भवन परिसर में आज से बहुप्रतीक्षित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की भव्य शुरुआत हो चुकी है। इस ऐतिहासिक दो दिवसीय सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दुनिया भर के 21 देशों से प्रमुख संसदीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। इस बड़े आयोजन में ब्रिक्स के 11 पूर्ण सदस्य देशों के साथ-साथ 10 साझेदार देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं, जो वैश्विक मुद्दों पर मिलकर चर्चा करेंगे।
सम्मेलन का मुख्य उद्घाटन समारोह आज सुबह ठीक 10 बजे संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में आयोजित किया गया है। लोकसभा अध्यक्ष और इस मंच के अध्यक्ष ओम बिरला इस दौरान उद्घाटन भाषण दे रहे हैं। इसके अलावा, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आज इन सभी विदेशी मेहमानों और संसद अध्यक्षों से विशेष रूप से मुलाकात करेंगे। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक कूटनीति और आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करना है।
इस बार के ब्रिक्स संसदीय मंच की बेहद महत्वपूर्ण थीम ‘जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना’ रखी गई है। इस दो दिवसीय महासम्मेलन के दौरान कुल चार प्रमुख सत्रों में चर्चा की जाएगी। इन सत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के दौर में विधायी निगरानी, डिजिटल तकनीकों के बढ़ते प्रभाव, संस्थागत क्षमता निर्माण और सतत विकास लक्ष्यों जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जा रहा है।
सम्मेलन के अंतिम दिन यानी 27 अक्टूबर को एक संयुक्त घोषणापत्र को औपचारिक रूप से अपनाया जाएगा। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला अपने समापन संबोधन के साथ इस साल की ब्रिक्स संसदीय मंच की अध्यक्षता आधिकारिक तौर पर चीन को सौंप देंगे। इस आयोजन से भारत को ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को वैश्विक मंच पर मजबूती से उठाने का एक सुनहरा अवसर मिला है।
बता दें कि इस मुख्य सम्मेलन से एक दिन पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रूस के संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ एक अहम द्विपक्षीय बैठक भी की थी। रूसी डेलीगेशन का नेतृत्व स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन ने किया। इस बैठक के दौरान दोनों देशों ने आतंकवाद के खासे मुद्दे पर एकजुटता दिखाई और वैश्विक मंचों पर आपसी सहयोग को भविष्य में और अधिक प्रगाढ़ बनाने का संकल्प लिया।










