उत्तर प्रदेश के कैराना में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक जनसभा के दौरान केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री और इस्राइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के बीच बढ़ती नजदीकियों को लेकर गंभीर चिंता जताई। ओवैसी का मानना है कि इस तरह के कूटनीतिक समीकरणों से देश के राष्ट्रीय और आर्थिक हितों को भारी नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए सरकार को इस दिशा में पुनर्विचार करने की सख्त जरूरत है।
अपने संबोधन के दौरान ओवैसी ने पश्चिम एशिया में बन रहे युद्ध के हालातों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि देश को शांति के पक्ष में स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। ओवैसी ने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री मोदी को सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात करके क्षेत्र में तनाव और युद्ध टालने का आग्रह करना चाहिए, ताकि वैश्विक स्तर पर शांति कायम रह सके।
एआईएमआईएम प्रमुख ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि पश्चिम एशिया का यह संकट और अधिक गंभीर होता है, तो इसका सीधा असर आम भारतीय नागरिकों की जेब पर पड़ेगा। युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और रसोई गैस के दाम आसमान छूने लगेंगे, जिससे देश के भीतर महंगाई बेकाबू हो जाएगी। इसके अलावा, युद्धग्रस्त इलाकों में रह रहे लाखों प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर भी बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
सऊदी अरब में फंसे भारतीय नागरिकों का मुद्दा उठाते हुए ओवैसी ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने बताया कि उमरा करने गए लगभग चार हजार भारतीय जायरीन इस समय सऊदी अरब में बुरी तरह फंसे हुए हैं और अपने वतन लौटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि इन सभी यात्रियों को सुरक्षित भारत लाने के लिए तुरंत विशेष विमानों की व्यवस्था की जाए।
अपने भाषण के अंत में ओवैसी ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि इन फंसे हुए तीर्थयात्रियों को जल्द स्वदेश नहीं लाया गया, तो उनके सामने विकट मानवीय संकट पैदा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े देश के नागरिकों को विदेशों में इस तरह लावारिस नहीं छोड़ा जा सकता है, और सरकार की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह संकट में फंसे अपने हर एक नागरिक की त्वरित मदद करे।










