शिवसेना यूबीटी के प्रमुख नेता और सांसद संजय राउत ने देश के मुख्य न्यायाधीश यानी सीजेआई सूर्यकांत के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांग ली है। राउत ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए अदालत में एक हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका इरादा कभी भी न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने का नहीं था।
अपने माफीनामे में संजय राउत ने यह बात जोर देकर कही है कि वह भारतीय न्यायव्यवस्था के सर्वोच्च सम्मान और उसकी स्वतंत्रता का पूरा आदर करते हैं। उन्होंने हलफनामे में लिखा है कि वह अपनी इच्छा से और पूरी तरह से बिना किसी शर्त के माफी मांगते हैं, क्योंकि वह न्यायालय के अधिकारों और उसकी प्रतिष्ठा को कम करने के बारे में सोच भी नहीं सकते।
बता दें कि यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब संजय राउत ने सोशल मीडिया पर अल्बानिया में हुए हिंसक प्रदर्शनों का एक वीडियो साझा किया था। इस पोस्ट के साथ उन्होंने कुछ ऐसी टिप्पणियां की थीं जिन्हें लेकर देश भर में भारी राजनीतिक बवाल मच गया था। बीजेपी और अन्य दलों ने उनके इस कदम को न्यायपालिका और देश की संवैधानिक संस्थाओं को धमकाने वाला करार दिया था।
माफिनामा दाखिल करने के बावजूद संजय राउत की मुश्किलें पूरी तरह से कम होती नजर नहीं आ रही हैं। हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान अदालत में उनके पक्ष से कोई भी वकील पेश नहीं हुआ था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।
अब शीर्ष अदालत ने संजय राउत को सख्त निर्देश देते हुए आगामी 17 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष पेश होने को कहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 17 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट उनके इस माफीनामे पर क्या रुख अपनाता है और आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं।










