तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है, जहां एक कथित नौकरी घोटाले के सिलसिले में सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस मामले के तहत पूर्व मंत्री और डीएमके नेता केएन नेहरू से जुड़े लगभग 25 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई है, जिससे राज्य का सियासी पारा पूरी तरह चढ़ गया है।
यह पूरा विवाद नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग में सरकारी नौकरियां दिलाने के नाम पर करीब 634 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वत लेने के आरोपों से जुड़ा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा मिली जानकारी के आधार पर मद्रास हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य की जांच एजेंसियों ने इस पूरे भ्रष्टाचार के नेटवर्क की फाइलें खंगालना शुरू कर दी हैं।
छापेमारी की इस कार्रवाई के दौरान जब जांच अधिकारियों की टीम तिरुचिरापल्ली में पूर्व मंत्री के आवास पर पहुंची, तो वहां सैकड़ों की संख्या में डीएमके कार्यकर्ता जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं क्योंकि विपक्षी दल इसे सोची-समझी रणनीति का हिस्सा बता रहे हैं।
इस बीच, डीएमके प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्य की सत्ताधारी पार्टी पर बेहद तीखे शब्दों में हमला बोला है। उन्होंने इन छापों को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताते हुए कहा कि आगामी तिरुचिरापल्ली ईस्ट उपचुनाव से पहले जनता का ध्यान भटकाने के लिए यह सब ‘रेड शो’ किया जा रहा है।
एमके स्टालिन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि इन हथकंडों से उनकी पार्टी या एक भी कार्यकर्ता डरने वाला नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार विरोधियों को दबाने के लिए सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है, लेकिन डीएमके जनता के बीच जाकर इन सभी नीतियों का पूरी मजबूती से विरोध करती रहेगी।










