Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आम लोगों की परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। शहर अभी रसोई गैस (LPG) संकट से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि अब पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। गुरुवार सुबह से ही शहर के लगभग सभी प्रमुख पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जिसने नोटबंदी के समय की तस्वीरें ताजा कर दीं।
हजरतगंज से गोमती नगर तक लंबी कतारें
हजरतगंज, गोमती नगर और आलमबाग जैसे प्रमुख इलाकों में स्थिति बेहद चिंताजनक नजर आई। कई जगहों पर वाहनों की कतारें किलोमीटर तक फैल गईं, जिससे यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। हालात को संभालने के लिए पुलिस को मौके पर तैनात होना पड़ा और ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़े।
अफवाहों ने बढ़ाया संकट, ‘स्टॉक खत्म’ के बोर्ड लगे
सुबह से ही शहर में यह खबर तेजी से फैलने लगी कि डिपो से तेल की आपूर्ति बंद हो गई है। इस सूचना के फैलते ही लोग घबराकर पेट्रोल पंपों की ओर उमड़ पड़े। कुछ ही घंटों में कई पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ जमा हो गई। दोपहर तक कई पंपों पर ‘स्टॉक खत्म’ के बोर्ड लग गए, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
तेल खत्म होने की खबर के बाद कतारों में खड़े लोगों का धैर्य टूटता नजर आया। कई स्थानों पर पंप कर्मचारियों और लोगों के बीच तीखी बहस और हंगामे की घटनाएं सामने आईं।
घंटों इंतजार से नाराज लोग, प्रशासन पर उठे सवाल
पेट्रोल भरवाने के लिए घंटों से लाइन में खड़े स्थानीय निवासी अभिषेक ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा,
“इस सरकार ने आम आदमी को सिर्फ लाइनों में खड़ा करना सिखा दिया है। पहले नोटबंदी में लाइन, फिर ऑक्सीजन के लिए और अब अपनी ही गाड़ी में तेल डलवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। यह प्रशासन की विफलता है।”
अभिषेक जैसे कई लोग इस संकट से सीधे प्रभावित हुए हैं। बड़ी संख्या में कामकाजी लोग और छात्र अपने दफ्तर और कॉलेज तक नहीं पहुंच सके। वहीं, डिलीवरी सेवाओं और ऑटो-रिक्शा चालकों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है, क्योंकि उनकी आजीविका पूरी तरह ईंधन पर निर्भर है।
प्रशासन की चुप्पी से बढ़ी चिंता
स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि इतने बड़े संकट के बावजूद प्रशासन और तेल कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्पष्ट जानकारी के अभाव में लोग घबराहट में आकर अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल करवा रहे हैं, जिससे उपलब्ध स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले 24 घंटों में आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो लखनऊ की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, शहर की सड़कों पर सामान्य गतिविधियों के बजाय पेट्रोल पंपों पर अफरा-तफरी, लंबी कतारें और लोगों की बेचैनी साफ तौर पर देखी जा रही है, जो आने वाले समय के लिए गंभीर संकेत दे रही है।
Author: Shivam Verma
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