तेलंगाना हाईकोर्ट ने पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज मामले में केंद्रीय मंत्री के बेटे बंदी साई भगीरथ को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। नाबालिग लड़की के कथित यौन उत्पीड़न से जुड़े इस मामले में अदालत ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी। वहीं, अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखते हुए अगली सुनवाई के लिए 21 मई की तारीख तय की गई है।
आधी रात तक चली सुनवाई, कोर्ट ने अंतरिम राहत से किया इनकार
मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ की जस्टिस टी. माधवी देवी ने की। सुनवाई देर रात तक चली, जहां दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत दलीलें पेश की गईं।
भगीरथ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस. निरंजन रेड्डी ने अदालत से अनुरोध किया कि अग्रिम जमानत पर अंतिम फैसला आने तक उनके मुवक्किल की गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि इस चरण में किसी प्रकार का अंतरिम संरक्षण देने का कोई आधार नहीं बनता।
बचाव पक्ष ने मामले को बताया राजनीतिक साजिश
बचाव पक्ष की ओर से कोर्ट में कहा गया कि भगीरथ और कथित पीड़िता के बीच आपसी संबंध थे और लड़की के परिवार को इसकी जानकारी थी। वकील ने यह भी दावा किया कि घटना पिछले वर्ष की है और काफी समय बाद कानूनी सलाह लेकर शिकायत दर्ज कराई गई।
बचाव पक्ष के अनुसार, शुरुआती एफआईआर में केवल जमानती धाराएं शामिल थीं, लेकिन बाद में दुर्भावनापूर्ण तरीके से ‘पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट’ जैसी गंभीर धाराएं जोड़ी गईं।
वकील ने अदालत में यह भी कहा कि केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार और राज्य की सत्ताधारी पार्टी के बीच राजनीतिक विरोध है। ऐसे में इस मामले को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर देखा जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि कानून-व्यवस्था राज्य सरकार के अधीन होने के कारण केंद्रीय मंत्री जांच को प्रभावित नहीं कर सकते।
सरकारी वकील ने पेश किए उम्र संबंधी दस्तावेज
राज्य सरकार और पुलिस की ओर से पेश हुए पब्लिक प्रोसिक्यूटर पल्ले नागेश्वर राव ने अग्रिम जमानत याचिका का जोरदार विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि पीड़िता नाबालिग है और उसकी जन्म तिथि वर्ष 2008 की है। सरकारी पक्ष के मुताबिक, पीड़िता की वर्तमान उम्र 17 वर्ष 3 महीने है।
सरकारी वकील ने बताया कि उम्र संबंधी प्रमाण के तौर पर जन्म प्रमाण पत्र और 10वीं की मार्कशीट अदालत को सीलबंद लिफाफे में सौंपे गए हैं। उन्होंने कहा कि पीड़िता का बयान दर्ज होने के बाद मामले की गंभीरता सामने आई, जिसके बाद पॉक्सो एक्ट की कड़ी धाराएं जोड़ी गईं।
पीड़िता के वकील ने लगाए गंभीर आरोप
पीड़िता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पप्पु नागेश्वर राव ने अदालत में कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि 1 जनवरी को पीड़िता एक फार्महाउस में बिना कपड़ों के उठी थी और आरोप है कि उसे शराब पिलाई गई थी।
वकील ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही ‘संगप्पा’ नामक व्यक्ति के जरिए समझौते के प्रयास किए जाने का भी आरोप लगाया गया।
आरोपी पर पहले से दर्ज हैं दो एफआईआर
पीड़िता पक्ष के वकील ने अदालत में दावा किया कि बंदी साई भगीरथ के खिलाफ पहले से दो एफआईआर दर्ज हैं। इसके अलावा, चार अन्य लड़कियों को कथित रूप से परेशान किए जाने के आरोप भी लगाए गए, जो आने वाले समय में सामने आ सकते हैं।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस टी. माधवी देवी ने फैसला सुरक्षित रख लिया। अब इस मामले में अदालत 21 मई को अपना निर्णय सुनाएगी।
Author: Shivam Verma
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