West Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से विधायक सोहनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर नामित किए जाने के बावजूद विधानसभा सचिवालय ने अब तक इस पर स्पष्ट फैसला नहीं लिया है। इसी बीच सचिवालय ने तृणमूल कांग्रेस द्वारा भेजे गए उस पत्र को खारिज कर दिया है, जिस पर पार्टी महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर थे।
80 विधायकों के समर्थन पत्र की मांग
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विधानसभा सचिवालय ने सोहनदेव चट्टोपाध्याय से 80 विधायकों के हस्ताक्षर वाला समर्थन पत्र मांगा है। बताया गया है कि तृणमूल कांग्रेस की ओर से भेजे गए पत्र में उन्हें नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता देने की मांग की गई थी, लेकिन सचिवालय ने उस पत्र को पर्याप्त नहीं माना।
विवाद की मुख्य वजह यह बनी कि पत्र पर हस्ताक्षर अभिषेक बनर्जी के थे। सचिवालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अभिषेक बनर्जी सांसद और पार्टी महासचिव जरूर हैं, लेकिन तृणमूल विधायक दल में उनके पास कोई औपचारिक पद नहीं है। ऐसे में उनके हस्ताक्षर को मान्यता देने पर सवाल उठाए गए।
आरटीआई दाखिल करने को मजबूर हुए चट्टोपाध्याय
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बालीगंज विधायक सोहनदेव चट्टोपाध्याय ने सूचना का अधिकार (RTI) दाखिल किया है। उन्होंने RTI में यह जानकारी मांगी है कि वर्ष 2011, 2016 और 2021 में नेता प्रतिपक्ष के चयन के लिए विधानसभा सचिवालय ने किन नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया था।
चट्टोपाध्याय का कहना है कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुनने के लिए सामान्य तौर पर इस तरह की औपचारिक चिट्ठी की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने कहा कि आमतौर पर विधानसभा सचिवालय सीधे संबंधित व्यक्ति को सूचित कर देता है कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष चुना गया है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय पर अब तक ताला लगा हुआ है, जिससे स्थिति और अधिक विवादित हो गई है।
सचिवालय के रुख पर उठे सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेजरी बेंच के एक सदस्य ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अभिषेक बनर्जी आखिर इस तरह का पत्र जारी करने वाले कौन होते हैं। सदस्य के अनुसार, वह सांसद और तथाकथित महासचिव हैं, लेकिन विधायक दल में उनका कोई आधिकारिक पद नहीं है। ऐसे में उनके हस्ताक्षर को मान्यता नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि “ये बकवास अब रुकनी ही चाहिए।”
13 मई को सौंपा गया था पत्र
बताया गया है कि 13 मई को तृणमूल कांग्रेस की ओर से विधानसभा सचिव समरेंद्र नाथ दास को एक पत्र सौंपा गया था। इस पत्र पर अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर थे।
पत्र में फिरहाद हाकिम को विपक्ष का चीफ व्हिप बनाए जाने की जानकारी दी गई थी। इसके अलावा नयन बंदोपाध्याय और आशिमा पात्रा को उपनेता नियुक्त करने की बात भी कही गई थी।
नियुक्ति प्रक्रिया पर सचिवालय की आपत्ति
सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि विधानसभा सचिवालय ने सोहनदेव चट्टोपाध्याय की नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। सचिवालय का कहना है कि विधायक दल की आंतरिक बैठक में विधायकों को अपना नेता चुनना चाहिए था।
सूत्रों के मुताबिक, सचिवालय ने उस बैठक के नतीजों और उससे जुड़े दस्तावेजों का ब्योरा भी मांगा है। वहीं, चट्टोपाध्याय का कहना है कि नियमों के अनुसार विपक्ष में सबसे बड़े दल को केवल 30 सीटों की आवश्यकता होती है और प्रक्रिया उसी आधार पर आगे बढ़नी चाहिए।
Author: Shivam Verma
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