Arvind Kejriwal: आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। मंगलवार को सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने ईडी की कार्रवाई को पंजाब के हिंदू व्यापारियों से जोड़ते हुए भाजपा को निशाने पर लिया।
केजरीवाल ने अपने पोस्ट में कहा, “ED पार्टी आज फिर पंजाब के हिंदू व्यापारियों पर ED की रेड कर रही है। ED पार्टी पंजाब के छोटे-छोटे हिंदू व्यापारियों को तंग कर रही है। मेरी सभी व्यापारियों से अपील है – घबराने की कोई बात नहीं है, पूरा पंजाब और पंजाब सरकार आपके साथ है, हम सब मिलकर ED पार्टी का मुकाबला करेंगे।”
गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल इन दिनों भाजपा के लिए “ईडी पार्टी” शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा और उनसे जुड़े कुछ ठिकानों पर हुई छापेमारी को लेकर उन्होंने इसे हिंदुओं के खिलाफ कार्रवाई के रूप में पेश करने का प्रयास किया।
केजरीवाल के बयान ने खड़े किए राजनीतिक सवाल
राजनीतिक गलियारों में केजरीवाल के इस बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आमतौर पर धार्मिक या सांप्रदायिक मुद्दों से दूरी बनाए रखने वाले केजरीवाल ने इससे पहले भी कुछ अवसरों पर सॉफ्ट हिंदुत्व की रणनीति अपनाई है, लेकिन ईडी की कार्रवाई को सीधे हिंदू व्यापारियों से जोड़ना राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चर्चा का विषय बन गया है।
2013 में पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद “इंसान का इंसान से हो भाईचारा” का संदेश देने वाले केजरीवाल को अब पंजाब की राजनीति में अलग रणनीति अपनाते हुए देखा जा रहा है।
पंजाब को लेकर सतर्क नजर आ रही है आम आदमी पार्टी
आम आदमी पार्टी की स्थापना के एक दशक के भीतर दिल्ली और पंजाब में सत्ता हासिल करने वाले अरविंद केजरीवाल पंजाब को लेकर विशेष रूप से सतर्क दिखाई दे रहे हैं। दिल्ली में पिछले वर्ष भाजपा के हाथों राजनीतिक झटका मिलने के बाद पार्टी के लिए पंजाब सबसे महत्वपूर्ण राज्य बन गया है।
हालांकि पंजाब में भाजपा फिलहाल चौथे स्थान की राजनीतिक ताकत मानी जाती है, लेकिन हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों में भाजपा के चुनावी प्रदर्शन ने विपक्षी दलों की चिंता बढ़ाई है। भाजपा पहले अकाली दल के साथ पंजाब में सत्ता का हिस्सा रह चुकी है और पार्टी नेतृत्व के हालिया बयानों ने दोनों दलों के संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चाओं को जन्म दिया है।
सिख बहुल राज्य में ‘हिंदू कार्ड’ की रणनीति
पंजाब की राजनीति में केजरीवाल के इस रुख के पीछे भाजपा की सामाजिक और चुनावी रणनीति को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। भाजपा राज्य में हिंदू मतदाताओं के साथ-साथ सिख समुदाय के बीच भी अपना आधार मजबूत करने का प्रयास कर रही है।
हाल ही में भाजपा ने जट सिख नेता सरदार केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि पार्टी का पारंपरिक आधार मुख्य रूप से हिंदू मतदाताओं में माना जाता है।
पंजाब के मतदाता आंकड़ों के अनुसार राज्य में लगभग 57 प्रतिशत सिख और 38 प्रतिशत हिंदू मतदाता हैं। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केजरीवाल भाजपा को हिंदू विरोधी बताकर उसके संभावित वोट बैंक को प्रभावित करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
भाजपा ने लगाया समाज को बांटने का आरोप
केजरीवाल के बयान पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि आगामी पंजाब चुनावों में संभावित हार को देखते हुए वह हिंदू और सिख समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
एक वीडियो संदेश में सिरसा ने कहा, “आगामी पंजाब चुनाव में अपनी हार को देखते हुए केजरीवाल जी ने आज सिख और हिंदू भाइयों को लड़ाने के लिए साजिश भरा बयान दिया है। उन्होंने ट्वीट किया कि ED हिंदू व्यापारियों के ऊपर रेड कर रही है। मैं पंजाब पुलिस से आग्रह करता हूँ कि उनके खिलाफ दंगे भड़काने और शांतिपूर्ण प्रदेश में आग लगाने की कोशिश के लिए कार्रवाई की जाए।”
कांग्रेस ने भी जताई आपत्ति
कांग्रेस ने भी केजरीवाल के बयान की आलोचना की है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि पंजाब को ऐसी राजनीति से बचाने की आवश्यकता है जो समाज को धार्मिक या सामुदायिक आधार पर विभाजित करने का प्रयास करती हो।
रंधावा ने कहा कि पंजाब की पहचान किसी एक धर्म, वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य की असली ताकत भाईचारे, साझा विरासत और आपसी विश्वास की भावना में निहित है।
पंजाब में ईडी की कार्रवाई को लेकर शुरू हुआ यह राजनीतिक विवाद अब धार्मिक और सामाजिक विमर्श का रूप लेता दिखाई दे रहा है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मुद्दे का राज्य की राजनीति और विभिन्न दलों की चुनावी रणनीतियों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
Author: Shivam Verma
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