World News: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में आयोजित आईआरआईजीसी-टेक (IRIGC-TEC) के 27वें सत्र की संयुक्त अध्यक्षता करते हुए भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का आह्वान किया है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर तक पहुंचाना है। विदेश मंत्री ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हुआ है और आपसी विश्वास द्विपक्षीय संबंधों की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले पांच वर्षों में भारत और रूस के बीच व्यापार में ऐतिहासिक वृद्धि देखी गई है। यह व्यापार वर्ष 2021-22 के लगभग 13 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 तक 60 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। हालांकि, विदेश मंत्री ने इस दौरान बढ़े हुए व्यापार असंतुलन पर भी चिंता जताई। वर्तमान में यह असंतुलन लगभग 50 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसे संतुलित करना अब दोनों देशों की प्राथमिकता में शामिल है।
व्यापारिक बाधाओं को दूर करने के लिए विदेश मंत्री ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने बाजार तक पहुंच को आसान बनाने, टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाने के साथ-साथ एक मजबूत भुगतान प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया है। इसके अलावा, भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के बीच प्रस्तावित ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ को लेकर भी सकारात्मक चर्चा की गई, जो भविष्य में आर्थिक साझेदारी को और अधिक गति प्रदान कर सकता है।
बैठक के दौरान विदेश मंत्री ने द्विपक्षीय सहयोग को प्रभावी बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण सुझाव पेश किए हैं। सबसे पहला सुझाव कार्य समूहों के कामकाज में क्रियान्वयन और ठोस परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना है। दूसरा, व्यापारिक जगत और उद्योगपतियों के साथ निरंतर जुड़ाव बनाए रखना ताकि व्यावहारिक समस्याओं का समाधान हो सके। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण सुझाव नए आर्थिक अवसरों की निरंतर तलाश करना है ताकि व्यापारिक संभावनाओं का पूरा दोहन किया जा सके।
अंत में, भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी पर जोर देते हुए जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों ने हमेशा बदलती वैश्विक स्थितियों के अनुसार खुद को ढाला है। दिसंबर 2025 में हुए वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद, यह बैठक दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। भारत की ओर से इन सुधारों पर अमल करने से न केवल व्यापार असंतुलन कम होगा, बल्कि दोनों राष्ट्रों की अर्थव्यवस्थाओं को भी मजबूती मिलेगी।
Author: Shivam Verma
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